सीपीएस की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की गुणवत्ता पर 18 सितंबर को होगी सुनवाई

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

1 सितंबर 2023

Hearing to be held on September 18 on merits of petitions challenging CPS appointments

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीपीएस की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की गुणवत्ता पर सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सीपीएस को काम करने से रोकने की मांग को फिलहाल लंबित रखा है। मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सीपीएस की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि सभी याचिकाएं हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार दायर नहीं की गई हैं।

याचिकाकर्ता ऊना से विधायक सतपाल सिंह सत्ती और अन्य 11 विधायकों ने मामले के अंतिम निपटारे तक सभी सीपीएस को काम करने से रोकने के आदेशों की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतरिम राहत के लिए दायर आवेदन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए निपटाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने कहा कि पहले सरकार की ओर से उठाए गए गुणवत्ता के मामले को निपटाया जाना जरूरी है। सीपीएस की नियुक्तियों को तीन याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई है। सबसे पहले वर्ष 2016 में पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था ने सीपीएस को चुनौती दी थी। नई सरकार की ओर से सीपीएस की नियुति किए जाने पर उन्हें प्रतिवादी बनाये जाने के लिए आवेदन किया गया।
उसके बाद मंडी निवासी कल्पना देवी ने भी सीपीएस की नियुक्तियों को लेकर याचिका दायर की गई है। भाजपा नेता सत पाल सत्ती ने उपमुख्यमंत्री समेत सीपीएस को चुनौती दी है। अदालत सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। अर्की विधानसभा क्षेत्र से सीपीएस संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। सभी याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पंजाब में भी ऐसी नियुक्तियां की गई थीं, जिन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को असांविधानिक ठहराया था।

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