
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार अब इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। प्रदेश सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर दी है। एसएलपी में पंचायत चुनाव से जुड़े हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच एक ने 30 अप्रैल तक राज्य में चुनाव संपन्न कराने के आदेश दिए थे, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की डबल बेंच ने राज्य सरकार को प्रदेश में 30 अप्रैल से पहले पंचायती राज चुनाव संपन्न करने के आदेश दिए थे। हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को राज्य की कांग्रेस सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हिमाचल सरकार ने मामले में एसएलपी दायर करते हुए राज्य में लागू डिजास्टर एक्ट को आधार बनाया गया है। सरकार का तर्क है कि प्रदेश को बरसात से भारी आपदा का सामना करना पड़ा राज्य में अभी भी आपदा एक्ट लागू है। पंचायती राज राज्य के अधीन है और इसे संसद के कानून डिजास्टर एक्ट के ऊपर नहीं रखा जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील में गई है। अब इस मामले में सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता डिक्कन कुमार ठाकुर और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले पर 9 जनवरी को फैसला सुनाया था। उच्च अदालत की खंडपीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 30 अप्रैल तक पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने के भी आदेश जारी किए थे। इसके अलावा अदालत ने 28 फरवरी तक चुनाव संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कहा था। याचिकाकर्ता पक्ष ने तब तर्क दिया था कि सरकार डिजास्टर एक्ट हवाला देकर पंचायती राज चुनाव को नहीं टाल सकती है।





