
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
27 मई 2023
देशभर में तैयार होने वाली ढींगरी मशरूम अब सेब के गूदे से भी तैयार की जा सकेगी। सेब के अवशेष और भूसे से कल्टीवेशन के बाद तैयार मशरूम की क्वालिटी और वैरायटी पहले से बेहतर होगी। इससे गेहूं पर तैयार की गई ढींगरी मशरूम से उपज भी दो गुना अधिक होगी। मशरूम के लिए भूसे की कमी भी दूर होगी। इसका नौणी विवि के विशेषज्ञों ने सफल प्रशिक्षण कर लिया है।
ढींगरी मशरूम में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर्स होते हैं। यह दिल की बीमारियों के अलावा मोटापा कम करने और डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक है। ढींगरी मशरूम हिमाचल समेत देशभर में तैयार की जा रही है। हिमाचल में हरियाणा, पंजाब से गेहूं से भूसा लाया जाता है, लेकिन हिमाचल के किसानों के लिए यह महंगा पड़ता है। अब सेब से जूस निकालने के बाद इसके अवशेष मशरूम उगाने के काम आएंगे। वर्तमान में सेब के अवशेष किसी काम में नहीं आते हैं। सेब प्रोसेसिंग यूनिट के बाहर, सड़कों के किनारे खुले में फेंका जाता है। अब इससे मशरूम बनाने का काम लिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश जैसे फल राज्य, जहां का सेब और उससे निर्मित उत्पाद देश भर में मशहूर है। अकेले सेब की अर्थव्यवस्था 5000 करोड़ से अधिक की है और प्रदेश के किसानों की अर्थिकी मजबूत हुई है। हर वर्ष हजारों टन सेब का जूस निकाला जाता है। रस निकालने के बाद, बचे हुए जैव-अवशेष जिसे पोमेस कहा जाता है, जो कुल सेब के ठोस अवशेषों का लगभग 50 प्रतिशत होता है, व्यर्थ हो जाता है। आमतौर पर इसे कारखाने के आस-पास डंप किया जाता है जो पर्यावरण प्रदूषण के लिए भी जिम्मेदार होता है।
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