
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और इसके आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में अंग्रेजों की ओर से करीब 100 साल पहले लाई गई 12 पेड़ों की प्रजातियां गुमनामी में उगती रहीं। अब पता चलने पर हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला और वन्य प्राणी विंग ने इनका दस्तावेजीकरण किया है। इसके चलते शिमला और आसपास चिह्नित लकड़ी वाले पेड़ों की प्रजातियां 138 से बढ़कर 150 हो गई हैं। इन 12 प्रजातियों को शिमला स्थित पश्चिमी हिमालयन टेंपरेट आर्बोरेटम में प्रदर्शन के लिए रखा गया है, जबकि यहां पर 138 प्रजातियों को संरक्षण के लिए जुटाया जा रहा है।
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी शिमला के वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिश्टू ने बताया कि हेनरी कॉलेट की 1902 में लिखी पुस्तक कॉलेट फ्लोरा सिमलेंसिंस में लकड़ी वाले पेड़ों की 138 प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। इस पुस्तक में जिन पेड़ों का उल्लेख नहीं है और जो पिछले 100 साल से शिमला व इसके आसपास के क्षेत्रों में उगाए जा रहे हैं, ऐसे पेड़ों की करीब 12 प्रजातियों को चिह्नित कर लिया गया है। अब यहां उगने वाले पेड़ों की 150 प्रजातियां हो गई हैं। इनमें से ज्यादातर प्रजातियों को शिमला में बनाए गए आर्बोरेटम में रखा जा चुका है। नई मिली 12 प्रजातियों को केवल प्रदर्शन के लिए रखा गया है। इन्हें उगाए जाने को अधिक प्राेत्साहन नहीं दिया जाता है।





