
हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना न करने पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति व रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चाैहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि दो दिन के भीतर कोर्ट के फैसले की अनुपालना न करने पर क्यों न इनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। अदालत ने कहा है कि न्यायालय की ओर से 6 जनवरी 2020 को जो निर्णय दिया गया है, उसकी अनुपालना की जाए। मामले को सुनवाई के लिए 7 मई को रखा गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जीपीएफ नियम के मुताबिक उन्हें ब्याज दिया जाए, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें बैंक की दरों पर ब्याज दिया गया।
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की जारी वरिष्ठता सूची को ठहराया सही
हिमाचल हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी वरिष्ठता सूची को यूजीसी के नियमों के तहत सही ठहराया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि संबंधित उम्मीदवारों की चयन समिति की सिफारिशें करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति के लिए पात्रता की यूजीसी ओर से तैयार यूजीसी विनियम के तहत की गई है। अदालत ने पाया कि वर्ष 15 सितंबर, 2020 की वरिष्ठता सूची यूजीसी विनियमों और कानूनों और अध्यादेश के अनुरूप की गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की धारा 10 और 10.1 विनियम, 2010 में प्रत्यक्ष नियुक्ति के लिए पिछली सेवा की गणना करने का स्पष्ट प्रावधान है। सीएएस के तहत भर्ती और पदोन्नति में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि पिछली नियमित सेवा, चाहे राष्ट्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय हो। सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर के रूप में या विश्वविद्यालय, कॉलेज, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं या अन्य में समकक्ष वैज्ञानिक पेशेवर संगठन यानी सीएसआईआर, आईसीएआर, डीआरडीओ, यूजीसी, आईसीएसएसआर, आईसीएचआर, आईसीएमआर, डीबीटी आदि को सीधी भर्ती के लिए गिना जाना चाहिए। सीएएस के तहत पदोन्नति बशर्ते पदधारी के पास योग्यता हो। यूजीसी के तहत सहायक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए निर्धारित योग्यता उम्मीदवार के पास होनी चाहिए।





