
खबर अभी अभी ब्यूरो
28 जून 2023
\अशोक वर्मा ने पांचवीं तक शिक्षा एवीएन स्कूल नाहन से हासिल की। जवाहर नवोदय विद्यालय नाहन से 12वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने चेन्नई से एयरो स्पेस में बीटेक किया। यहां उनका चयन आईआईटी खड़गपुर के लिए हुआ। इस दौरान वह राष्ट्रपति अब्दुल कलाम अवार्ड से भी सम्मानित हुए।
हिमाचल के बेटे डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने अंतरिक्ष विज्ञान में पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को समूचे विश्व में गौरवान्वित किया है। अंतरिक्ष खगोलीय संघ (आईएयू) के वर्किंग ग्रुप स्मॉल बॉडीज नॉमनक्लेचर ने दुनिया के वैज्ञानिकों के नाम पर क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉयड) का नाम रखने का एलान किया है। इनमें चार भारतीय वैज्ञानिकों की सूची में नासा में तैनात हिमाचल के अशोक कुमार वर्मा (39) का नाम भी शामिल है। आईएयू ने क्षुद्रग्रह 2001 एफजी 122 (क्षुद्रग्रह 28964) का नाम उनके नाम पर रखा है। नाहन में 1984 में जन्मे वर्मा पिछले दो साल से नासा में भारतीय खगोल वैज्ञानिक हैं।
आईएयू ने गुजरात की भारतीय ग्रह भूविज्ञानी रुतु पारेख, अहमदाबाद के वैज्ञानिक कुमार वेंकटरमणी और भारतीय वैज्ञानिक अश्विन शेखर को भी सम्मानित किया है। क्षुद्रग्रह खगोलीय पिंड होते हैं, जो ब्रह्मांड में विचरण करते रहते हैं। आकार में ग्रहों से छोटे, लेकिन उल्का पिंडों से बड़े होते हैं। आईएयू खगोलविदों का एक अंतरराष्ट्रीय संघ है, जिसका मिशन अनुसंधान, संचार, शिक्षा और विकास सहित खगोल विज्ञान के सभी पहलुओं को बढ़ावा देना और सुरक्षित रखना है।
यह खगोलीय पिंडों का भी नाम निर्दिष्ट करता है। चार छोटे ग्रहों के नाम भारतीय वैज्ञानिकों के नाम पर रखे गए हैं। चार नए नामित क्षुद्रग्रह अशोक वर्मा, कुमार वेंकटरमणी, रुतु पारेख और अश्विन शेखर हैं। बता दें कि मूल रूप से जिला सोलन की कुठाड़ पंचायत के गांगुड़ी गांव के रहने वाले जगतराम वर्मा और शकुंतला वर्मा के घर जन्मे अशोक वर्मा ने पांचवीं तक शिक्षा एवीएन स्कूल नाहन से हासिल की। जवाहर नवोदय विद्यालय नाहन से 12वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने चेन्नई से एयरो स्पेस में बीटेक किया। यहां उनका चयन आईआईटी खड़गपुर के लिए हुआ।
इस दौरान वह राष्ट्रपति अब्दुल कलाम अवार्ड से भी सम्मानित हुए। इसके बाद एयरो स्पेस एजेंसी फ्रांस से पीएचडी की। इसके बाद वह यूसीएलए कैलिफोर्निया में आठ साल बतौर एस्ट्रो फिजिक्स वैज्ञानिक रहे। पिछले दो साल से वह नासा में तैनात हैं। इस उपलब्धि पर उनके बड़े भाई सुरेंद्र वर्मा ने खुशी जताई है। अमेरिका से बातचीत में अशोक वर्मा ने बताया कि उन्हें अब तक की उपलब्धियों के लिए यह सम्मान मिला है।
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