
कांगड़ा। देशभर में चर्चा में रहे इच्छामृत्यु मामले में हरीश राणा का संबंध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से है। हरीश राणा के परिवार की जड़ें जयसिंहपुर उपमंडल की पंचायत सरी के प्लेटा गांव से जुड़ी रही हैं। स्थानीय लोगों ने हरीश राणा के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि भले ही परिवार लंबे समय से प्रदेश से बाहर रह रहा हो, लेकिन अपने पैतृक स्थान से जुड़ाव हमेशा बना रहता है।
हरीश राणा के पूर्वज मूल रूप से प्लेटा गांव के निवासी थे
यही कारण है कि जब इस घटना की जानकारी सामने आई, तो लोगों ने इसे अपने क्षेत्र से जुड़ा मामला मानते हुए परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट की। उधर, पंचायत सरी की निवर्तमान प्रधान रीमा कुमारी ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हरीश राणा के पूर्वज मूल रूप से प्लेटा गांव के निवासी रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाद में हरीश राणा के पिता अशोक राणा रोजगार और अन्य कारणों से प्रदेश से बाहर जाकर बस गए। हालांकि परिवार के सदस्य समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते-जाते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दी पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति
हरीश राणा के परिवार में उनके पिता अशोक राणा, मां निर्मला देवी, भाई आशीष और बहन भावना हैं। पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की। दरअसल, गाजियाबाद निवासी हरीश राणा वर्ष 2013 में पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र थे और उस समय पीजी में रह रहे थे। एक दिन वह चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी। इस हादसे के बाद वह कोमा में चले गए और पिछले 13 वर्षों से बेहोशी की हालत में थे। डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की संभावना लगभग न के बराबर है। बीते 13 वर्षों से उनके पिता अशोक राणा हर दिन बेटे के ठीक होने की उम्मीद में संघर्ष करते रहे, लेकिन डॉक्टरों की राय और लंबे उपचार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी।





