
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों में अंशकालिक सदस्यों की नियुक्ति के लिए चयन समिति की सिफारिशों को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले पर असंतोष व्यक्त करते हुए कड़ी फटकार से लगाते हुए सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा के खंडपीठ ने सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। खंडपीठ ने कहा कि अगर 11 अप्रैल 2025 के आदेशों की अनुपालना नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दायर किया जाएगा।आदेश के अनुपालन में हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से 21 अप्रैल, 2025 को जारी एक कार्यालय आदेश रिकॉर्ड पर रखा गया था। इस आदेश ने अंशकालिक सदस्यों की नियुक्ति के लिए चयन समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने में सक्षम प्राधिकारी की असमर्थता व्यक्त की। इस अस्वीकृति कारण उपभोक्ता संरक्षण (नियुक्ति की योग्यता, भर्ती की विधि, नियुक्ति की प्रक्रिया, पदावधि, राज्य आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों का त्यागपत्र और निष्कासन) नियम 2020 का नियम 6 (10) बताया गया।





