
जिला ब्यूरो सिरमौर
सिरमौर जिला के पच्छाद उपमंडल के अंतर्गत सराहां में बन रहा बाल विकास परियोजना अधिकारी और सामाजिक न्याय एवं कल्याण अधिकारी का कार्यालय पिछले एक वर्ष से भवन का कार्य अधूरा पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि यह भवन लगभग 80 प्रतिशत बनकर तैयार हो चुका है, परंतु पिछले एक वर्ष से इसका निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है, जिससे संबंधित कार्यालय आज भी निजी भवनों में किराए पर चलने को मजबूर हैं।
वर्ष 2019 में जब इस भवन का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया और ₹1.94 करोड़ की राशि स्वीकृत कर 2020 में हिमुड़ा (हिमाचल अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) के माध्यम से इसका कार्य शुरू करवाया गया। लेकिन अब लगभग पाँच वर्ष बीत चुके हैं, और यह भवन अब तक अधूरा है।
सीडीपीओ सराहां दीपक चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि जो राशि भवन निर्माण के लिए मिली थी, वह नाकाफी थी। एक और डीपीआर बनाकर ₹1.20 करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग सरकार से की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला है। नतीजतन भवन का कार्य रुका हुआ है।
बात करें भवन की स्थिति की, तो इसमें तीन फ्लोर बन चुके हैं जिसमें सीडीपीओ कार्यालय,तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय, एक सभा हॉल, स्टोर और स्टाफ के लिए कमरे शामिल हैं। फर्श पर टाइलें लग चुकी हैं, दीवारों पर लकड़ी का काम और पेंटिंग हो चुकी है, यहां तक कि लिफ्ट की जगह भी तैयार है। मगर खिड़की-दरवाजों, बिजली, प्लंबिंग व अन्य अंतिम चरण के कार्य अधूरे हैं।
खुला पड़ा यह अधूरा भवन अब बदहाली का शिकार हो रहा है। बारिश का पानी कमरों में जमा हो रहा है, लकड़ी और पेंट खराब हो चुका है। स्थिति यह हो गई है कि गली के आवारा कुत्ते, जानवर यहां डेरा डाले हुए हैं, कोई इसे शौचालय बना रहा है।
इस संदर्भ में जब महिला एवं बाल विकास विभाग, शिमला के निदेशक डॉ. पंकज ललित से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी इस मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन वह इस दिशा में शीघ्र उचित कदम उठाएंगे।
अब जनता की मांग है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर इस भवन को जल्द से जल्द पूरा करवाए, ताकि जरूरी विभाग स्थायी भवन में शिफ्ट हो सकें और जनता को राहत मिल सके। वरना यह अधूरा भवन विकास की नहीं, लापरवाही की गवाही देता रहेगा।





