18,570 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के लिए 32 किमी की चढ़नी होगी खड़ी चढ़ाई

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

7 जुलाई 2023

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की श्रीखंड महादेव यात्रा 7 जुलाई से शुरू होगी। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग पहले आधार शिविर सिंघगाड पहुंचकर सुबह 5:30 बजे पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना करेंगे। 18,570 फीट ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को कई ग्लेशियर पार कर दो दिन में 32 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होगी। इतने ही दिन वापसी के लिए लगते हैं।

यात्रा 20 जुलाई तक प्रशासन की देखरेख में चलेगी। अब तक यात्रा के लिए 5,000 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। यात्रा के दौरान पांच आधार शिविर बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं को संकरे रास्ते और कई ग्लेशियर पार करने होते हैं। पार्वतीबाग से आगे कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी के चलते दिक्कतें पेश आती हैं।

श्रीखंड महादेव यात्रा को सुलभ बनाने के लिए पिछले नौ सालों से श्रीखंड ट्रस्ट समिति एवं जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। एसडीएम निरमंड एवं श्रीखंड ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह ने बताया कि 7 जुलाई से शुरू होने जा रही 32 किमी की पैदल श्रीखंड महादेव यात्रा को पांच सेक्टरों में बांटा गया है। इसमें 100 से अधिक कर्मचारियों के साथ ही बचाव टीमें भी तैनात रहेंगी। पहले बेस कैंप सिंघगाड़ में 40 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। यहां प्रतिदिन सुबह 5:00 से शाम 7:00 बजे तक श्रद्धालुओं का पंजीकरण और फिटनेस जांची जाएगी। यहां से शाम चार बजे तक ही श्रद्धालुओं का जत्थों यात्रा के लिए रवाना किया जाएगा।  एसडीएम मनमोहन सिंह ने बताया कि इस बार ऑनलाइन 250 रुपये फीस के साथ यात्री पंजीकरण कर सकते हैं।
वर्ष 2014 से श्रीखंड यात्रा के दौरान सेवाएं देने वाले डॉक्टर यशपाल राणा ने बताया कि पार्वती बाग से ऊपर कई यात्रियों को ऑक्सीजन की कमी के चलते तबीयत बिगड़ने लगती है। ऐसे यात्री जिनको ऑक्सीजन की कमी महसूस हो, ज्यादा सांस फूलना, सिरदर्द होना, चढ़ाई न चढ़ पाना, उल्टी की शिकायत होना, धुंधला दिखना और चक्कर आना जैसे लक्षण आना शुरू हो तो ऐसे यात्री तुरंत आराम करें और नीचे की ओर उतरकर बेसकैंप में चिकित्सक से संपर्क करें। यात्री अपने साथ एक पक्का डंडा, ग्रिप वाले जूते, बरसाती छाता, सूखे मेवे, गर्म कपडे़, टॉर्च और ग्लूकोज लेकर जरूर आएं। कठिन और जोखिम भरी श्रीखंड महादेव यात्रा को 2014 से ट्रस्ट के अधीन किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद नौ सालों में करीब 32 श्रद्धालु इस कठिनतम यात्रा में अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए भी यह यात्रा किसी चुनौती से कम नहीं हैं।
बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को शिमला से रामपुर का करीब 130 किमी का सफर बस या टैक्सी से तय किया जा सकता है। इसके बाद रामपुर से निरमंड 17 किमी और निरमंड से जाओं का 23 किमी का सफर वाहन से तय करना होता है। इसके आगे श्रीखंड महादेव तक का पैदल करीब 32 किमी का सफर यात्रियों को करना होता है।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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