
#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*
10 फरवरी 2023
कांग्रेस सरकार ने विधायक निधि के बाद अब विकास कार्यों के लिए उपायुक्तों को मिलने वाला करोड़ों का अनुदान भी रोक दिया है। आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका जैसा संकट पैदा होने की बात करने वाली प्रदेश की नई सरकार ने आम लोगों के विकास के कार्यों का बजट तो रोक दिया है, लेकिन मंत्रियों, कैबिनेट रैंक के नेताओं और सीपीएस की कोठियों पर जिस तरह से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, उससे तो लग रहा है कि राज्य में कोई आर्थिक संकट नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि करीब 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार के पास मंत्रियों, सीपीएस की शानो-शौकत और ठाठ-बाट के लिए धन की कोई कमी नहीं है। सचिवालय हो या मंत्रियों, कैबिनेट रैंक पर नियुक्त नेताओं की कोठियां ही हों। महीने भर से इनकी मरम्मत और सजावट का काम चल रहा है। हालांकि, मंत्रियों की कोठियों की हालत ऐसी नहीं थी कि इन पर इतना पैसा बहाया जा सके, लेकिन सरकार साज-सज्जा से कोई समझौता नहीं करना चाहती है।
मंत्रियों, सीपीएस, कैबिनेट रैंक वाले नेताओं व पदाधिकारियों के दफ्तरों और कोठियों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि विकास के लिए पैसा नहीं है। जनता के लिए संपर्क सडक़ों, सामुदायिक भवनों आदि पर खर्च होने वाली विधायक क्षेत्र विकास निधि की चौथी किस्त को रोक दिया गया है। राज्य सचिवालय में मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों के दफ्तरों की बात करें तो कहीं टीक, पाइन आदि की बेशकीमती लकड़ी दीवारों में सज रही है या सीलिंग हो रही है। कहीं टाइलें बदली जा रही हैं तो कहीं लकड़ी का काम पूरा होने के बाद रंग-रोगन हो रहा है। मुख्यमंत्री के सरकारी निवास सहित मंत्रियों की कोठियों को भी इसी तरह से चकाचक किया जा रहा है

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