# ओपीएस के लिए 800 करोड़ खर्चेंगे इस साल * छत्तीसगढ़ से मिलता-जुलता होगा मॉडल

खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन

14 जनवरी 2023

हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम  देने के लिए इस साल करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वक्त में इसका बजट और बढ़ जाएगा। यह मालूम रहे कि प्रदेश में नई पेंशन स्कीम वाले इस साल 1500 से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त होने हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने का फार्मूला छत्तीसगढ़ से मिलता-जुलता हो सकता है।
राज्य सरकार के वित्त विभाग की अधिसूचना के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अधिसूचना जारी होने तक अभी वित्त विभाग के अधिकारी इसके पत्ते नहीं खोल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कर्मचारी केंद्र से पैसा वापस लाकर पिछली रकम को खुद जमा कर रहे हैं। वहां पर कर्मचारियों को ओपीएस में आने या एनपीएस में बने रहने के दोनों ही विकल्प दिए गए हैं। हालांकि, हिमाचल सरकार ने इस संबंध में देर रात तक भी अधिसूचना जारी नहीं की। पर जहां तक छत्तीसगढ़ के फार्मूले की बात है तो वहां पर  निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार के कर्मचारी एक नवंबर 2004 के स्थान पर एक अप्रैल 2022 को छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि के सदस्य बनेंगे।

साथ ही राज्य सरकार ने एक अप्रैल 2022 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को एनपीएस में बने रहने या पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प दिया था। इसके लिए कर्मचारियों से वहां शपथ पत्र भी मांगा जा रहा है। यदि कोई कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का विकल्प चुनता है, तो उसे 1 नवंबर 2004 से 31 मार्च 2022 तक सरकार के योगदान और लाभांश को एनपीएस खाते में राज्य सरकार को जमा करना पड़ता है।
वहीं, सरकारी कर्मचारियों को इस अवधि के दौरान एनपीएस में जमा कर्मचारी अंशदान और लाभांश एनपीएस नियमों के तहत देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, यह तो छत्तीसगढ़ की व्यवस्था है, पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल का अपना सर्वश्रेष्ठ मॉडल बताया है तो इससे लग रहा है कि यह छत्तीसगढ़ के मॉडल से कुछ भिन्न भी हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों पर कुल बजट के 100 में से 35 से 40 रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वक्त में यह खर्च और भी बढ़ सकता है।
नई पेंशन स्कीम में कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी हिस्सा कटता है। इसमें सरकार की ओर से 14 फीसदी की हिस्सेदारी दी जाती है। इस स्कीम के तहत सेवानिवृत्ति पर पेंशन पाने के लिए एनपीएस फंड का 40 फीसदी निवेश करना होता है।
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