# सूडान में 24 घंटे के लिए रुकेगी लड़ाई #सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के बीच हुआ सीजफायर का समझौता # अब तक 200 लोगों की मौत |

ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन

19 अप्रैल 2023

तस्वीर खार्तूम की है जहां लड़ाई के बीच एक घर टूट गया।

सूडान में मिलिट्री और पैरामिलिट्री के बीच जारी लड़ाई 24 घंटो को लिए थमेगी। ये आज शाम 6 बजे से लागू हो जाएगी। इसके लिए दोनों गुटों के बीच एक समझौता हुआ है। अल- अरेबिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच दोनों के बीच कुछ समझौता कराए जाने की कोशिश हो सकती है। इससे पहले सेना के चीफ ने कहा था कि लड़ाई में पैरामिलिट्री को कुछ पड़ोसी देशों का साथ मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए थे।

वहीं, लड़ाई के बीच कर्नाटक के 31 आदिवासी सूडान में फंस गए हैं। सभी लोग सूडानी शहर अल-फशेर में रह रहे हैं। ये लोग आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी बेचने के लिए सूडान गए थे। इनमें से 19 लोग कर्नाटक के हुनसूर, 7 शिवामोगा और 5 लोग चन्नागिरी के रहने वाले हैं।

खार्तूम में सभी दुकानें बंद हैं... इसके चलते लोगों के पास खाने के सामान की कमी हो रही है।

सूडान में फंसे भारतीयों में से एक एस. प्रभू ने इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बात की। उसने बताया कि हम पिछले 4-5 दिनों से एक किराए के मकान में फंसे हुए हैं। हमारे पास खाना या पीने के लिए कुछ भी नहीं है। बाहर से लगातार धमाकों की आवाज आ रही है। यहां कोई हमारी मदद करने को तैयार नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर कन्नड़ विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- सूडान में फंसे भारतीयों के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। उन्हें उनकी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया गया है। वहीं, सूडान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 200 हो गई है।

तस्वीर सूडान में फंसे कर्नाटक के आदिवासी परिवार की है। (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्स्प्रेस)

सोमवार को RSF के लड़ाकों ने अमेरिकी दूतावास के काफिले और EU के ऐंबैस्डर पर भी हमला कर दिया। इसकी जानकारी अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि काफिले की गाड़ियों पर अमेरिका का झंडा लगा हुआ था।

साथ ही उसकी लाइसेंस प्लेट भी दूतावास की थी। फिर भी हमला किया गया। ब्लिंकन ने बताया कि वो हमले की जांच कर रहे हैं।

सूडान में सिर्फ अमेरिकी काफिले पर ही नहीं बल्कि RSF और सेना के बीच की लड़ाई में EU के ऐंबैस्डर एडन ओ हारा पर भी हमला हुआ। दरअसल, RSF के कुछ लड़ाके दरवाजा तोड़कर ओ हारा के घर घुस गए।

उन्हें गनपॉइंट पर रखकर उनसे सारे पैसे लूट लिए। हालांकि, इस हमले उन्हें मामूली चोट आई। ओ हारा ने हमलावरों की पहचान उनकी यूनिफॉर्म से की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक खार्तूम की गलियों में लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। दोनों गुट टैंक, आर्टिलरी और खतरनाक हथियारों से लड़ रहे हैं।

तस्वीर में सूडान में हो रही फायरिंग को देखा जा सकता है।

सूडान में लड़ रहे दोनों गुटों को अलग-अलग देशों का समर्थन है। अलजजीरा के मुताबिक आर्मी को मिस्र का साथ है, जबकि पैरामिलिट्री ग्रुप को UAE और सऊदी अरब से मदद मिलती रही है। हालांकि, सभी देशों ने दोनों गुटों से लड़ाई रोकने की अपील की है।

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र संघ के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि अगर ये लड़ाई अभी नहीं रुकी तो इससे पूरा देश तबाह हो सकता है।

खार्तूम में सभी दुकानें बंद हैं… इसके चलते लोगों के पास खाने के सामान की कमी हो रही है।

2000 के दशक में सूडान के पश्चिमी इलाके डार्फर में विद्रोह शुरू हो गया था। इससे निपटने के लिए सेना ने जंजावीद मिलिशिया की मदद ली। ये मिलशिया ही आगे चलकर रेपिड सपोर्ट फोर्स में बदल गया और अलग-अलग मिशन में सेना की मदद करने लगा।

डार्फर इलाके में हुआ विद्रोह सबसे जानलेवा विद्रोह में शामिल है। 2003 से 2008 के बीच इस लड़ाई में 3 लाख लोगों की जान गई। वहीं, 20 लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 2009 में इस मामले में सूडान के तानाशाह ओमार हसन अल बशीर पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप लगाए थे।

तानाशाह अल बशीर ने डार्फर विद्रोह कुचलने में मदद करने वाले जंजावीद लड़ाकों को सरकारी दर्जा देना चाहता था। इसके चलते 2013 में इसे RSF में बदल दिया गया।

  • सूडान में मिलिट्री और पैरामिलिट्री के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। 2019 में सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर को सत्ता से हटाने के लिए लोगों ने प्रदर्शन किया।
  • अप्रैल 2019 में सेना ने राष्ट्रपति को हटाकर देश में तख्तापलट कर दिया, लेकिन इसके बाद लोग लोकतांत्रिक शासन और सरकार में अपनी भूमिका की मांग करने लगे।
  • इसके बाद सूडान में एक जॉइंट सरकार का गठन हुआ, जिसमें देश के नागरिक और मिलिट्री दोनों का रोल था। 2021 में यहां दोबारा तख्तापलट हुआ और सूडान में मिलिट्री रूल शुरू हो गया।
  • आर्मी चीफ जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान देश के राष्ट्रपति और RSF लीडर मोहम्मद हमदान डागालो उपराष्ट्रपति बन गए। इसके बाद से RSF और सेना के बीच संघर्ष जारी है।
  • सिविलियन रूल लागू करने की डील को लेकर मिलिट्री और RSF आमने-सामने हैं। RSF सिविलियन रूल को 10 साल बाद लागू करना चाहती है, जबकि आर्मी का कहना है कि ये 2 साल में ही लागू हो जाना चाहिए।
  • ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन

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