अब हिमाचल सचिवालय में अटकी केंद्रीय विश्वविद्यालय की फाइल

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

27 जुलाई 2023
Now Central University file stuck in Himachal secretariat

 पिछले 14 साल से केंद्रीय विश्वविद्यालय के भवन निर्माण को लेकर सरकारों का गैरजिम्मेदाराना रवैया जस का तस बना हुआ है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला कैंपस (जदरांगल) के निर्माण को लेकर एफसीए केस की फाइल शिक्षा सचिव शिमला के पास अटक गई है।

जदरांगल में वन विभाग की करीब 57 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ों को काटने के लिए बनी करीब 30 करोड़ रुपये मुआवजा राशि हिमाचल सरकार वन विभाग और केंद्र सरकार के कुछ विभागों के बैंक खातों में जमा नहीं करवा रही है। जब तक हिमाचल सरकार 30 करोड़ रुपये मुआवजा राशि वन विभाग और केंद्र सरकार के कुछ विभागों के पास जमा नहीं करेगी तब तक वन विभाग की जमीन कांगड़ा जिला प्रशासन केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम नहीं कर सकता है।

जब तक केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम वन विभाग की जमीन नहीं होगी तब तक भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा। केंद्रीय विश्वविद्लाय के भवन निर्माण के लिए सरकार की ओर से नोडल आफिसर बनाए एसडीएम धर्मशाला धर्मेश रमोत्रा ने इस साल 4 जुलाई को पेड़ों के काटने आदि की मुआवजा राशि का आकलन कर फाइल निदेशक शिक्षा विभाग को भेज दी थी।करीब 20 दिन बीतने के बाद भी यह फाइल सचिव शिक्षा विभाग के पास अटकी है। सरकार के अधिकारी 30 करोड़ रुपये मुआवजा राशि जमा करवाने को लेकर कोई फैसला नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि 30 करोड़ की मुआवजा राशि जमा करवाने को लेकर अधिकारी बड़े नेताओं की सहमति का इंतजार कर रहे हैं।

इससे पहले प्रदेश सरकार के अधिकारियों की नाकामी के कारण कुछ माह पहले धर्मशाला के जदरांगल में चयनित भूमि केंद्र सरकार की समिति ने रद्द् कर दी थी। जनता के दबाव के बाद कांगड़ा जिला प्रशासन ने मेहनत करके केंद्र सरकार के अनापत्तियों को दुरुस्त करके दोबारा फाइल दिल्ली भेजी थी। केंद्र सरकार ने दोबारा भेजी फाइल को स्वीकृत कर धर्मशाला में केंद्रीय विवि के निर्माण को हरी झंडी दे दी थी।

अब हिमाचल सरकार को चयनित जमीन पर कटने वाले पेड़ और उसकी जगह नए पौधे लगाने के लिए मुआवजा राशि वन विभाग और केंद्र सरकार के कुछ विभागों में जमा करवानी है। मुआवजा आकलन तो कांगड़ा जिला प्रशासन ने कर दिया है लेकिन इस फाइल को शिमला में बैठे अधिकारियों ने अटका दिया है।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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