
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
2 नवंबर 2023
लाहौल और स्पीति जिला के ताबो में कृषि विज्ञान केंद्र की चौथी वैज्ञानिक सलाहकार समिति (एसएसी) की बैठक इस सप्ताह आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने की, जिन्होंने बैठक में ऑनलाइन भाग लिया। बैठक में विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंद्र देव, विभिन्न विभागों के सदस्य, प्रगतिशील किसान और वैज्ञानिक शामिल हुए। आईसीएआर-अटारी जोन-I के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश राणा ने बैठक में ऑनलाइन भाग लिया।
केवीके ताबो के प्रभारी डॉ. आर॰एस॰ सिपहिया ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति का स्वागत किया और पिछले वर्ष में केवीके की गतिविधि रिपोर्ट और आगामी वर्ष के लिए वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की। उन्होंने केवीके द्वारा किए गए कार्यों और स्पीति घाटी के कृषक समुदाय के उत्थान में इन कार्यक्रमों के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर चंदेल ने सेब की खेती और अन्य कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने में कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यों की सराहना की, जिससे क्षेत्र के किसानों की आर्थिकी मजबूत हुई है। हुर्लिंग जैसे गांवों के किसानों, जो स्वेच्छा से अपनी खेती को रसायन मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, की पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्पीति घाटी की खेती में रसायनों का उपयोग बहुत कम है और इसलिए केवीके द्वारा क्षेत्र की पारंपरिक फसलों को मिलकर प्राकृतिक खेती मॉडल विकसित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर जौ और गेहूं जैसे स्थानीय अनाजों के प्रसंस्करण पर कार्य करने का आग्रह किया।
निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ इंदर देव ने कृषि और बागवानी में स्थानीय ज्ञान और समाधान को बढ़ावा देने के लिए किसानों और संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सदस्यों को हुर्लिंग विलेज में पंजीकृत फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को विश्वविद्यालय और केवीके के तकनीकी समर्थन का भी आश्वासन दिया। इस अवसर पर आईसीएआर के प्रतिनिधि डॉ. राजेश राणा का विचार था कि क्षेत्र की अच्छी गुणवत्ता और अत्यधिक पोषक कृषि उत्पाद एक विशेषता है जिसका उपयोग ब्रांडिंग रणनीतियों को क्रियान्वित करने और स्थानीय एफ॰पी॰सी॰ के माध्यम से मात्रा सुनिश्चित करके किया जाना चाहिए।
कृषि गतिविधियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत दीर्घकालिक स्थिरता कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के भी सुझाव इस बैठक में दिए गए। सदस्यों ने सेब मोनोकल्चर से निपटने के लिए फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय औषधीय पौधों और स्थानीय श्री अन्न की खेती की वकालत की।
इसके अतिरिक्त एक अन्य कार्यक्रम में, केवीके ताबो में एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा भी आयोजित की गई जिसमें विभिन्न गांव के 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया जिसमें वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न कृषि गतिविधियों पर तकनीकी जानकारी दी गई। हुर्लिंग और लिदांग गाँव में प्रगतिशील किसानों के खेतों का दौरा भी किया गया।
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