
#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*
29 अप्रैल 2024

हिमाचल प्रदेश लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। इसकी हालत भी पड़ोसी राज्य पंजाब की तरह हो रही है। पंजाब सरकार पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण है तो हिमाचल पर भी 90 हजार करोड़ रुपये का चढ़ चुका है। यह आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। सरकार तो पांच-पांच साल के अंतराल में आती-जाती रहीं हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस और भाजपा सरकारें ही इस कर्ज को कम करने के लिए कोई जादू की छड़ी नही ला पाईं और न ही लोकसभा के लिए चुनकर भेजे गए सांसद ही केंद्र सरकार से इस तरह की मदद ला पाए, जिससे कि यह ऋणमोचन हो सके।
पंजाब की अनुमानित जनसंख्या 3.17 करोड़ है तो वहां पर हर व्यक्ति पर करीब एक लाख 12 हजार रुपये का ऋण है। हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या करीब 70 लाख है। ऐसे में यहां पर प्रतिव्यक्ति पर लगभग 1,28,571 रुपये का ऋण है। इस तरह जनसंख्या से तुलना करें तो प्रदेश में प्रति व्यक्ति ऋण पंजाब से भी ज्यादा है। राज्य को कर्ज में डुबोने का मुद्दा इस बार लोकसभा चुनाव में भी मुखर है। कांग्रेस कह रही है कि पिछली भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर विरासत में देनदारियां छोड़ दी हैं। पिछली भाजपा सरकार खुद को डबल इंजन वाली कहती थी, तब भी कर्ज बढ़ता ही गया। वहीं, भाजपा का आरोप है कि राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने पिछले सवा साल में कर्ज लेने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।





