
ख़बर अभी अभी सोलन ब्यूरो
06 मई 2024
भारत की अर्थव्यवस्था के तेजी से आगे बढ़ने के जो संकेत उभर रहे हैं, उन्हें चार जून के बाद नई स्थिर सरकार से आर्थिक पंख लग जाएंगे। भारत की अर्थव्यवस्था को दिशा एएनआई इन दिनों प्रकाशित हो रही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और विभिन्न बाजार विश्लेषणों में कहा जा रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था के तेजी से आगे बढ़ने के जो शुभ संकेत उभरकर दिखाई दे रहे हैं, उन्हें चार जून के बाद नई स्थिर सरकार से आर्थिक पंख लग जाएंगे। ऐसे मजबूत आर्थिक परिदृश्य की संभावनाओं के तीन महत्वपूर्ण कारण गिनाए जा रहे हैं। एक भारत के वित्तीय और गैर वित्तीय क्षेत्रों के दमदार बही-खाते। दो रिजर्व बैंक के द्वारा भारत सरकार को दिया गया रिकॉर्ड लाभांश और तीन शेयर बाजार की रिकॉर्ड ऊंचाई।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि वर्ष 2024-25 में भारत की विकास दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। विश्व बैंक ने 6.6 प्रतिशत विकास दर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। एशियाई विकास आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, विकास दर 7 प्रतिशत रह सकती है। देश के प्रमुख अर्थ विशेषज्ञों का मत है कि जहां पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में विकास दर सात प्रतिशत से अधिक है, वहीं यह आगामी दशक तक 6.5 से सात प्रतिशत के स्तर पर दिखाई देगी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, भारत में वर्ष 2023-24 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 17.7 फीसदी बढ़कर 19.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है। 2023-24 में जीएसटी उच्चतम स्तर पर रहा है। इसका आकार 20.18 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 फीसदी अधिक है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 22 मई को वित्त वर्ष 2023-24 में भारत सरकार को 2.11 लाख करोड़ रुपये लाभांश देने की मंजूरी दी है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में सरकार ने रिजर्व बैंक और सरकारी बैंकों के लाभांश से 1.02 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था। ऐसे में ‘रिजर्व बैंक द्वारा दिया जाने वाला लाभांश बजट अनुमान की तुलना में 107 फीसदी ज्यादा है। यह एक तरह से सरकार के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 1.09 लाख करोड़ रुपये के अप्रत्याशित लाभ जैसा है। साथ ही पिछले साल के 87,416 करोड़ रुपये लाभांश की तुलना में 142 फीसदी ज्यादा है।





