
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रान्त महामंत्री डॉ मामराज पुंडीर ने मुख्यमंत्री द्वारा हिमाचल दिवस पर प्रदेश के कर्मचारियों को 14 प्रतिशत से ज्यादा डीए देने और एक जून 2025 से डीए की तीन प्रतिशत किश्त की घोषणा करने पर हैरानी जताते हुए कहाँ कि आज प्रदेश के कर्मचारियों का 13 प्रतिशत डीए सरकार के पास पड़ा है जो 4% एक जुलाई 2023 से, 4% एक जनवरी 2024, तीन प्रतिशत एक जुलाई 2024 से, दो प्रतिशत एक जनवरी 2025 से देने को है। इसके साथ साथ अभी तक मुख्यमंत्री ने जो डीए दिया भी है उसका एरियर भी सरकार ने नहीं दिया है। पूर्व सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरो को 2016 से वेतन आयोग की सिफारिशें लागु कर दी थी परन्तु उसके एरियर पर प्रदेश सरकार चुप है। डॉ मामराज पुंडीर ने सरकार की चमचागिरी मे व्यस्त कर्मचारी नेताओं को आइना दिखाते हुए कहा कि आज प्रदेश का कर्मचारी सिर्फ तनख्वाह तक सीमित रह गये है। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री जी ने डीए की घोषणा मई से की थी अब जून से हो गई। प्रदेश का कर्मचारी अपने परिवार को पालने के लिये दिन रात मेहनत करता है, सरकार द्वारा कर्मचारियों के वित्तीय लाभ दबाना दुर्भाग्य वश है। प्रदेश सरकार को सता मे आये तीन वर्ष का समय हो गया है और प्रदेश कर कर्मचारियों को सिर्फ चरण वध तरीके के सिवाए कुछ नहीं मिल रहा। पूर्व प्रान्त महामंत्री डॉ मामराज पुंडीर ने कहां कि अभी तक सरकार ने जो डीए दिया है वह २७ अप्रैल २०२३ को तीन प्रतिशत जो 01 /01 /2022 से 31 /03 /2023 तक जीपीएफ खातों में जाने का आदेश हुआ था, जिसकी अदायिगी नहीं हुई। और यहां डीए ३१ से ३४ प्रतिशत हुआ था। 2 मार्च 2024 को डीए देने के आदेश सरकार ने जारी किये जो 1/7 /22 से देय था और उसे मई 2024 से जारी किया गया। उसके बाद 16 अक्टूबर 2024 को एक आदेश डीए देने के किये जो ०१/०१/२०२३ से देय था और इसे अक्टूबर २०२४ से देय माना गया। सरकार ने अभी तक सिर्फ ११ प्रतिशत डीए दिया है जिसका एरियर अभी तक सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को नहीं दिया। हैरानी की बात है की मुख्यमंत्री जी ने तीन प्रतिशत द्वारा ३ प्रतिशत की घोषण करके प्रदेश के कर्मचारियों को अस्मजस में दाल दिया है क्योकि कर्मचारियों का 13 प्रतिशत डीए सरकार के पास पड़ा है जो 4% एक जुलाई 2023 से, 4% एक जनवरी 2024, तीन प्रतिशत एक जुलाई 2024 से, दो प्रतिशत एक जनवरी 2025 से देने को है तो आठ प्रतिशत को छोड़ कर सीधे ३ प्रतिशत पर आना गलत है, प्रदेश के कर्मचारियों के साथ बहुत बढ़ा धोखा हो रहा है जो कर्मचारी नेता सरकार के गुणगान करके अपने हिट सुरक्षित कर रहे है उनको चाटुकारिता का गोल्ड मैडल देकर सर्कार उनको विदेश दौरे पर भेज रही है। डॉ पुंडीर ने सरकार और सरकार के चाटुकार कर्मचारियों के नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए और शिक्षा विभाग में कई अधिकारी ऐसे बैठे है जिनका पूरा रिकॉर्ड हँमारे पास है उन को वक्त आने पर जबाब दिया जायेगा।
डॉ मामराज पुंडीर ने कहा कि केंद्र सरकार के पैसो का शिक्षा विभाग किस प्रकार दुरूपयोग कर रहा है इसका उदाहरण शिक्षा विभाग द्वारा बार बार विदेश दौरे और दूसरे राज्यों के भर्मण में भेजे गए शिक्षकों और शिक्षा निदेशालय और सचिवालय में बैठे क्लर्को के दौरे से देखने को मिलता है। हैरानी की बात है कि विदेश दौरे पर जिन शिक्षकों को भेजा गया या केरल और गुजरात सहित और राज्यों में जिन शिक्षकों का चयन हुआ , उनका चयन सचिवालय में हुआ, और उन में से अधिकतर शिक्षक ऐसे है जो या तो शिक्षा निदेशालय में सेवाएं दे रहे है या डेपुटेशन पर शिमला के नम्मी स्कूलों में काम कर रहे है ऐसे में 80 हजार से ज्यादा शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। अगर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री इस पर गहनता से जाँच करवाए तो कई विषय सामने आएंगे। प्रदेश के दूर दराज स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक हैरान और हताश है। डॉ मामराज पुंडीर ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस विषय की जाँच करवाने की मांग की है।
पिछले दिनों सरकार ने जो युक्तिकरण के आदेश निकले थे उसमे जिन शिक्षकों ने सरकार के आदेशों का पालन कर नए स्टेशन पर ज्वाइन कर दिया था उन के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है , कयोकि सरकार ने युक्तिकरण की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है और जो अपने आदेशों को मॉडिफाई करवाने के चक्क्र मे जिन्होंने जॉइन नहीं किया उनको फायदा हो गया। सर्कार को युक्तिकरण और जिन शिक्षकों ने ज्वाइन कर लिया है उनको भी न्याय दिलाने हेतु आदेशों को निरस्त कर उन्हें भी दोबारा अपने पुराने स्टेशनों पर वापिस बुला लेना चाहिए।
डॉ मामराज पुंडीर ने हैरानी जताते हुए सरकार के आदेशों के वावजूद जिन अध्यापको और कर्मचारियों ने दो वर्ष या उससे ज्यादा समय अनुवन्ध पर पूरा कर लिया है उअन्को नियमित करने के आदेश जाये कर दिए है , इसके वावजूद अभी तक जिल्ला मंडी सहित कई और जिले के अधिकारी आदेशों पर कुंडली मार कर बैठे है और अभी भी शिक्षक नियमित होने से वंचित है। मंडी जिले मे अभी तक एक भी शिक्षक नियमित नहीं हुआ है, कई शिक्षक तो पहले से तीन वर्ष का समय भी पूरा कर चुके है कयोकि उनकी नियमतिकरण मार्च में होनी थी अब मई आने वाला है। ऐसे अधिकारीयों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये।





