
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से संजौली,शिमला में भव्य श्री राम कथा आयोजन के चतुर्थ दिवस में कथा व्यास साध्वी सुश्री सौम्या भारती जी ने श्री राम विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम भगवान शिव के धनुष को भंग कर मां सीता का वरण करते हैं और सभी मानव समाज,देव,दानव और गन्धर्व खुशी में झूमने लगते हैं। साध्वी जी ने समझाते हुए कहा कि मां सीता आत्मा का प्रतीक है और प्रभु श्रीराम परमात्मा का। विवाह प्रसंग हमें संदेश देता है कि यदि हम अपनी आत्मा रूपी कन्या का भगवान श्री राम रूपी वर के संग विवाह करना चाहते हैं हमें अपने जीवन में एक विचोलिया के रूप में सतगुरु की आवश्यकता है । गुरु के बिना इंसान ईश्वर का दर्शन प्राप्त नहीं कर सकता है । आज बहुत से लोग गुरु को तो अपने जीवन में धारण करते हैं परंतु धर्म ग्रंथों की इस कसौटी के आधार पर नहीं। हमारे सभी धार्मिक ग्रन्थ कहते हैं कि पूर्ण सतगुरु वो हुआ करता है वो हमारे घट में ईश्वर का साक्षात्कार करवाता है। हम संत के चेहरे का नूर,उसके पीछे लगे लोगों की भीड़,मधुर वाणी आदि के आधार पर एक सतगुरु की पहचान करते हैं। लेकिन पूर्ण सन्त की पहचान केवल ज्ञान है।
कथा से पहले सुबोध सूद ने परिवार सहित विधिवत पूजन किया।
कथा में पूर्व उप महापौर शिमला राकेश शर्मा,भाजपा सचिव सीमा विज़न,पण्डित रमन शर्मा,लितेश कुमार ने दीप प्रज्वलित किया।
साध्वी जी ने युवा पीढ़ी को प्रेरणा देते हुए कहा कि युवा वह है जिनकी भुजाओं में अदम्य बल और मन में कुछ कर गुजरने का जनून होता है। लेकिन वहीं पीढ़ी आज मृतप्राय हो चुकी है।यदि युवा ही निष्क्रिय हो जाएंगे तो आने वाले समाज का भार अपने कंधों पर कौन संभालेगा? युवा ही तो भविष्य के कर्णधार होते हैं। इसलिए समय की मांग है उन्हें जगाया जाए। भगवान श्री राम जी ने अपनी लीलाओं के माध्यम से हमें यही सिखाया है कि कुरीतियों व गलत कार्यों को देख कर हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने से उनका दमन नहीं हो सकता। उनका विनाश कर समाज को सभ्य व सुंदर बनाने हेतु तो हमें सक्रिय होना है।अब समाज व राष्ट्र,शौर्य सम्पन्न युवाओं पर नजरें टिकाए बैठा है। क्योंकि हर काल में युवाओं ने ही समाज में से कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठा कर उनका समूल विनाश करने की कोशिश की। विवेकानंद जी, रामतीर्थ जी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर इत्यिादि अनेकों युवाओं ने समाजिक व्याधियों के विरुद्ध डट कर शौर्य पूर्ण कार्य किए और हमारे लिए प्रेरणा स्रोत बन गए। आज भी वैसे ही युवाओं की आवश्यकता है। लेकिन यदि युवा स्वयं ही नशे और कुरीतियों की पाश में बंधे हो तो वह किसी और को कुरीतियों से मुक्त कैसे करवा सकते हैं। स्वयं दलदल में फंसा मानव औरों को दलदल से कैसे निकाल सकता है।
श्री आशुतोष महाराज जी के कृपा हस्त तले परिवर्तित युवा वर्ग “युवा परिवार सेवा समिति” के नाम से संस्थान का अंग बनकर समाज को संवारने के कार्य में संलग्न है।
साध्वी गार्गी भारती,साध्वी गुरु गीता भारती,साध्वी मीनू भारती, स्वामी धीरानन्द,गौरव शर्मा,संजय खन्ना,डॉ पवन कुमार, अवमिंदर सिंह,राजकुमार शर्मा द्वारा मंगल आरती की गई।





