148 रूटों में से सिर्फ 35 पर दौड़ी प्राइवेट बसें, छह महीने बाद भी पूरी नहीं हुई कवायद

शिमला | हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी ने जो बस रूट पहले सरेंडर किए थे उनमें से अभी तक मात्र 35 बसें ही चल पाई हैं। बताया जाता है कि 148 रूटों को लगभग एक साल पहले सरेंडर किया गया था उनको आबंटित करने की प्रक्रिया छह महीने पहले पूरी हुई थी। उसके बाद जिन प्राइवेट ऑपरेटरों को रूट दिए गए वो अभी तक इन रूटों पर बसों का संचालन नहीं कर पाए हैं। अभी भी 113 ऐसे बस रूट हैं जिन पर बसों को नहीं चलाया जा सका है। हालांकि हिमाचल पथ परिवहन निगम इन रूटों पर अपनी सेवाएं दे रहा है, परंतु फिर भी प्राइवेट ऑपरेटरों को जो रूट दिए गए हैं उनके द्वारा बसों का संचालन नहीं हो सका है। परिवहन विभाग का मानना है कि बार-बार इनके द्वारा एक या दो महीने की छूट मांगी जाती है,परंतु फिर भी इनकी बसें नहीं चल पाई हैं।

अभी तक जो सूचना है उसके अनुसार 113 पर बसें नहीं चल पाई हैं। इसके लिए संबंधित लोगों को लिखित रूप में दे दिया गया है कि वो एक निश्चित अवधि बताएं कि उनके द्वारा कब तक बसों को तैयार करवा लिया जाएगा और रूट पर बस उपलब्ध हो जाएगी। एचआरटीसी ने हाल ही में 422 रूटों को सरेंडर किया है, जिस पर सरकार ने इन रूटों को प्राइवेट बस ऑपरेटरों को देने को कहा है। इससे एक दिन पहले परिवहन विभाग द्वारा चिन्हित 350 रूटों पर टैम्पो ट्रैवलर चलाने का निर्णय सरकार ने लिया है और वो रूट भी बेरोजगार युवाओं को दिए जाएंगे। एचआरटीसी का घाटा काफी ज्यादा बढ़ चुका है और इसके कर्मचारियों को समय पर वेतन की अदायगी नहीं हो पा रही है।

सेवानिवृत्त कर्मचारी को न ग्रैच्युटी न लीव इनकैशमेंट की अदायगी

यहां यह भी बता दें कि जो कर्मचारी एचआरटीसी से रिटायर हो रहे हैं उन कर्मचारियों को समय पर गेच्युटी व लीव इनकैशमेंट की अदायगी नहीं हो रही है। ऐसे 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं, जो कि पिछले साल रिटायर हुए हैं मगर अभी तक उनको वित्तीय लाभ हासिल नहीं हुए हैं।

Share the news