
हिमाचल हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और पीड़िता के बीच 9 वर्षों तक लंबे शारीरिक संबंध जारी रखना शादी का वादा था, यह अविश्वसनीय है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर कहीं भी नहीं पाया गया है कि याचिकाकर्ता ने पीड़िता से कोई झूठा वादा किया था। अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच शारीरिक संबंध लगभग एक दशक की लंबी अवधि तक जारी रहा। इस प्रकार का यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अपीलकर्ता प्रारंभिक स्तर से ही उससे शादी करने के झूठे वायदे करता रहा, जिसके आधार पर वह भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती रही।हाईकोर्ट ने मौजूद रिकॉर्ड सामग्री को ध्यान में रखते हुए कहा कि आरोप तय करने में त्रुटि पाई गई है। इसके चलते न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी पुरुष पर शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया जाता है और यदि उसे आपराधिक रूप से उत्तरदायी ठहराया जाता है तो ऐसा कोई भी शारीरिक संबंध सीधे किए गए झूठे वादे से जुड़ा होना चाहिए, न कि अन्य परिस्थितियों से।





