मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि क्या नियुक्ति के संबंध में कोई अधिसूचना जारी की गई है या नहीं। अगर नहीं की तो क्यों नहीं की, इस पर सरकार हलफनामा दायर करे।

cs prabodh Saxena's service extension challenged in High Court, court reprimanded him

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के सेवा विस्तार को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि क्या नियुक्ति के संबंध में कोई अधिसूचना जारी की गई है या नहीं। अगर नहीं की तो क्यों नहीं की, इस पर सरकार हलफनामा दायर करे। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि किन कारणों से राज्य ने चयन समिति की सिफारिशें रोके रखीं। नियुक्ति चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी रेरा अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी। जनहित याचिका में बताया गया है कि मुख्य सचिव को जो सेवा विस्तार किया है, वह केंद्र सरकार के निर्देशों के विपरीत है। मुख्य सचिव पर सीबीआई और विजिलेंस में मामला लंबित है और सरकार ने इनके कार्यकाल को छह माह के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (एचपी रेरा) के अध्यक्ष पद के लिए भी आवेदन किया था, जिसका अभी तक परिणाम घोषित नहीं किया। रेरा चयन समति के मुख्य न्यायाधीश अध्यक्ष होते हैं, जबकि शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव और विधि सचिव सदस्य होते हैं। 

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