
बघाट बैंक लोन मामले में नए से नए खुलासे हो रहे हैं। करीब 3.50 करोड़ ऋण मामले में गिरफ्तार गारंटर ने दावा किया कि उसको पता ही नहीं था कि वह गारंटर है। जब उसे गिरफ्तार किया गया तो मामले का पता चला। सहायक पंजीयक की अदालत में गारंटर ने बयान दिया है कि उसे मालूम नहीं था कि उसे 3.50 करोड़ रुपये की संपत्ति में ऋण मामले में गारंटर बनाया गया है। गारंटर का दावा है कि लोन के समय उसे यह नहीं बताया था कि उसे गारंटर बनाया जा रहा है और हस्ताक्षर करवा लिए। अब गारंटर खेतीबाड़ी करता है और उसकी वित्तीय स्थिति भी उतनी अच्छी नहीं है।
शनिवार देर रात पुलिस ने सलोगड़ा के एक गारंटर विनोद कुमार को सहायक पंजीयक की अदालत में पेश किया। जहां पर गारंटर ने खुलासे किए। हालांकि, गारंटर ने तर्क किया कि उसकी एक संपत्ति फोरलेन निर्माण में गई है। इसका कुछ विवाद अभी एक्साइज विभाग के साथ चल रहा है। मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। जैसे ही यह विवाद सुलझ जाएगा उसके बाद उसे करीब 70 से 80 लाख रुपये मिलेंगे, उसके बाद वह कुछ राशि चुका सकता है।
सहायक पंजीयक की अदालत ने उसे छोड़ दिया। गौरतलब है कि शनिवार को सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं सोलन की अदालत के आदेशों के बाद पुलिस ने सलोगड़ा क्षेत्र के विनोद कुमार को 3.49 करोड़ के लोन मामले में गिरफ्तार किया। विनोद कुमार एक फर्म का गारंटर था। उक्त फर्म की ओर से बघाट बैंक सोलन से ऋण लिया था, इसकी ब्याज सहित कुल देनदारी 3,49,26,957 रुपये बनती है। गारंटर को भी नोटिस भेजे गए, मगर वह भी पेश नहीं हुआ, इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं सोलन गिरीश नड्डा ने बताया कि अदालत में करीब 3.50 करोड़ ऋण मामले के एक गारंटर को पेश किया गया। इसमें गारंटर संबंधित लोन से अपने आप को अंजान बता रहा है। हालांकि, उसकी जमीन फोरलेन में गई है और उसमें करीब 70 से 80 लाख रुपये मुआवजा मिला है। इसमें कुछ विवाद के चलते एसडीएम कोर्ट में मामला अटका हुआ है। जैसे ही वहां स क्लीयर होगा तो उसने कुछ राशि जमा करवाने के लिए हामी भरी है। उसे फिलहाल छोड़ दिया है।





