
आखिर दस साल बाद दाह संस्कार के लिए जा रहे ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर बगीचे में बदल दिया गया श्मशान घाट का रास्ता खुलवाया। गांव के ही एक व्यक्ति ने रास्ते पर कब्जा कर बगीचा तैयार कर रखा था। दाह संस्कार के लिए जाते वक्त लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। रविवार को ग्रामीणों ने मौके पर शव रखकर प्रदर्शन किया और एसडीएम से संपर्क कर शव लेकर कार्यालय पहुंचने की चेतावनी दी। इसके बाद एसडीएम को पुलिस की टीम के साथ मौके पर आना पड़ा और रास्ता खुलवाया गया, तब जाकर दाह संस्कार हुआ।
यह मामला उपमंडल कुमारसैन की भुट्टी पंचायत के बलावग गांव का है। शनिवार को गांव में एक महिला की मौत हुई। रविवार को शव को श्मशान घाट ले जाते समय लोगों को फिर पुरानी समस्या का सामना करना पड़ा। लोगों ने जहां रास्ता बंद था, वहीं पर शव को रख दिया। इसके बाद सूचना एसडीएम कुमारसैन को दी। लोगों ने चेताया कि यदि रास्ता नहीं खोला गया, तो शव को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंच जाएंगे। इसके बाद एसडीएम पुलिस की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने श्मशान घाट को जाने वाले रास्ते से को बहाल कराया। तब जाकर ग्रामीण शव को लेकर श्मशान घाट गए और दाह संस्कार किया।
दस साल से था कब्जा, कर दिया था बगीचा तैयार
10 साल से श्मशान घाट जाने वाले रास्ते पर एक व्यक्ति ने अवैध कब्जा कर प्लम और नाशपाती का बगीचा तैयार किया है। लोगों को श्मशान घाट जाने के लिए दूसरे लंबे और कठिन रास्तों से जाना पड़ता रहा। समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार वन विभाग, प्रशासन और पुलिस अवगत करवाया, लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। लोग एक दशक तक परेशानी का सामना करते रहे।
पेड़ों को काटने के वन विभाग को दिए आदेश
एसडीएम मुकेश शर्मा ने बताया कि स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। श्मशान घाट के रास्ते पर अवैध रूप से लगाए प्लम और नाशपाती के पेड़ों को काटने के आदेश वन विभाग को दिए। उसके बाद लोगों को श्मशान घाट को जाने वाले रास्ते को कब्जा मुक्त कराया गया। उधर, स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई के लिए एसडीएम का आभार जताया।





