हिमुडा के जरिए सरकारी जमीन निजी बिल्डरों को देने की तैयारी का आरोप, पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने मांगा जवाब

घुमारवीं।
प्रदेश के पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग ने हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की सरकारी भूमि निजी बिल्डरों को सौंपने की तैयारी का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारियों ने हिमाचल की जनता को गहरी चिंता में डाल दिया है।

राजेंद्र गर्ग ने कहा कि वर्ष 2026 के पहले ही दिन प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार हिमाचल की कीमती जमीनें चुपचाप कुछ चुनिंदा निजी बिल्डरों को देने की प्रक्रिया चल रही है। यदि ये खबरें सही हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हिमाचल के इतिहास का सबसे बड़ा भूमि घोटाला साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि हिमुडा विभाग के मंत्री स्वयं राजेश धर्माणी हैं, ऐसे में इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है। गर्ग ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में प्रदेश की कीमती सरकारी जमीनें निजी बिल्डरों को सौंपी जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बद्दी–चंडीगढ़ बेल्ट के पास लगभग 3485 बीघा सरकारी भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत 5000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, तथा सिरमौर जिले के पच्छाद क्षेत्र में करीब 134 बीघा भूमि को कुछ निजी बिल्डरों को देने की प्रक्रिया चल रही है।

राजेंद्र गर्ग ने पूछा कि ये बिल्डर कौन हैं, जमीन किस दर पर और किन नियमों के तहत दी जा रही है, तथा क्या इसके लिए खुली नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई है या फिर बंद कमरे में सौदे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी है, तो सरकार को इससे जुड़े सभी दस्तावेज, शर्तें और लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता के सामने सच्चाई स्पष्ट हो सके।

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