Sirmaur Fire: रात को मदद के लिए दौड़ी मां; बेटियों, नाती-नातिन और दामाद को बाहर निकलने तक का नहीं मिला मौका

हिमाचल प्रदेश के सिरमाैर जिले के गिरिपार क्षेत्र में माघी पर्व की खुशियां अभी थमी भी नहीं थीं कि गुरुवार तड़के एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को मातम में डुबो दिया। इस हृदयविदारक हादसे में तीन मासूम बच्चों समेत दो बेटियां और एक दामाद जिंदा जल गए। माघी पर्व मनाने के लिए दो बेटियां अपने-अपने परिवार के साथ मां इंद्रा देवी के घर आई थीं। घर में रात तक जश्न का माहौल था। हंसी-खुशी के बीच किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह खुशी कुछ ही घंटों में कभी न भरने वाले सन्नाटे में बदल जाएगी। रात को कमरे में रखी अंगीठी से आग सुलझी और उसके बाद रसोईघर में एक के बाद एक दो सिलिंडर फटने से आग ने भयंकर रूप धारण कर पूरे मकान को चपेट में ले लिया। अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। आग की चपेट में आने से साथ लगते तीन खाली मकान और गोशाला भी जल गए।
इस एक फैसले ने बचा ली मामा-भांजे की जान

इंद्रा देवी का बेटा विक्रम और तृप्ता व नरेश का बेटा सूजल रात को खाना खाने के बाद दूसरे गांव सोने के लिए चले गए थे। रिश्ते में दोनों मामा-भांजा हैं। इसी एक फैसले ने उनकी जान बचा ली। लेकिन घर में सो रहे बाकी सदस्य किस्मत के इस क्रूर खेल से नहीं बच सके।

देखते ही देखते घर श्मशान में बदल गया

कविता पत्नी लोकेंद्र अपने पति और तीन बच्चों कृतिका (5), सारिका (13) और कृतिक (3) के साथ आई थीं। वहीं तृप्ता पत्नी नरेश अपने पति और बेटे सूजल के साथ मां के घर माघी मना रही थीं। रात करीब ढाई बजे इंद्रा देवी की नींद टूटी। उन्होंने कमरे से धुआं उठते देखा। घबराकर वह बाहर निकलीं और शोर मचाने लगीं, लेकिन तब तक आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। मां ने मदद के लिए दौड़ लगाई, चीखी-चिल्लाई, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें अपनी बेटियों, दामाद और नातियों को बाहर निकालने का एक पल भी नहीं मिला। मकान में रखे गैस सिलिंडर फट गए, जिससे आग और विकराल हो गई। देखते ही देखते घर श्मशान में बदल गया।

मां के सामने उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई

इस दर्दनाक हादसे में कविता, तृप्ता, नरेश और तीन मासूम बच्चे कृतिका, सारिका और कृतिक जिंदा जल गए। लोकेंद्र को स्थानीय लोगों ने किसी तरह खिड़की से बाहर निकाला, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस गए हैं। गोशाला में बंधे पशु भी आग की भेंट चढ़ गए। एक मां के सामने उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई। माधी की रात, जो खुशियों की होनी थी, वह गांव के लिए कभी न भूलने वाला काला सवेरा बन गई।

नौहराधार में महज मरहमपट्टी सोलन अस्पताल कर दिया रेफर

सिरमौर के विधानसभा क्षेत्र रेणुकाजी को पंचायत घंडूरी के गांव तलांगना में आग की लपटों से लोकेंद्र 16 फीसदी तक झुलस गए हैं। हाथ, पांव, सिर, मुंह और घुटनों में बर्न हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार से लोकेंद्र (42) को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन सुबह 9:00 बजे पहुंचाया। सर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने जांच की। इसके बाद सर्जरी वार्ड में भर्ती किया है। रिश्तेदारों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में केवल मरहमपट्टी देकर रेफर कर दिया गया। इसके बाद झुलसे व्यक्ति को जलन से कराहते हुए करीब तीन से चार घंटे का रास्ता तय कर क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाया। मरीज को 3:30 बजे चिकित्सकों ने छुट्टी दी। व्यक्ति बार-बार घर जाने की जिद कर रहा था। तहसीलदार सोलन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोलन सुभाष वर्माणी भी अस्पताल पहुंचे और व्यक्ति से बातचीत की।

Share the news