
शिमला,
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने शारीरिक शिक्षा अध्यापक (Physical Education Teacher – PET) भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने एकल न्यायाधीश द्वारा 19 जुलाई 2022 को दिए गए उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों को PET पद पर नियुक्ति हेतु शैक्षणिक योग्यता में छूट (relaxation) देने के निर्देश दिए गए थे।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया एवं न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2011 में राज्य सरकार द्वारा दी गई छूट केवल एक बार (one-time relaxation) और सीमित पदों के लिए थी, जिसे स्थायी या अनिश्चित काल तक लागू नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि किसी चयन प्रक्रिया में भाग लेने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती एवं पदोन्नति नियम (R&P Rules), 2011 के तहत योग्यता में छूट देना राज्य सरकार का विवेकाधीन अधिकार है और न्यायालय सरकार को छूट देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इस संदर्भ में न्यायालय ने कहा कि छूट का प्रावधान “may” शब्द पर आधारित है, जो अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक है।
न्यायालय ने यह तर्क भी अस्वीकार कर दिया कि पूर्व में Saroj Kumar मामले में दिए गए निर्णय के आधार पर अन्य अभ्यर्थियों को भी समान लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि उक्त निर्णय में कानून की कोई व्यापक घोषणा नहीं हुई थी, इसलिए वह बाध्यकारी मिसाल (precedent) नहीं माना जा सकता।
खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि अयोग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता एवं निष्पक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा और इससे योग्य उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होंगे।
अंततः, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को PET पद पर नियुक्ति अथवा आगे किसी प्रकार की शैक्षणिक छूट का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।





