नाट्य मंचन के दूसरे दिन अतिरिक्त जिलादंडाधिकारी रहे मुख्य अतिथि, कलाकारों के सशक्त अभिनय को सराहा

मंडी,
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में संस्कृति सदन कांगनीधार में आयोजित नाट्य मंचन के दूसरे एवं अंतिम दिन अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी डॉ. मदन कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दूसरे दिन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समकालीन विषयों पर आधारित नाटकों का प्रभावी मंचन किया गया।
उत्सव संस्था की ओर से “ओ रे मनवा” नाटक का मंचन किया गया। इसका मूल आलेख निर्मल वर्मा का है, जबकि नाट्य रूपांतरण व निर्देशन दक्षा शर्मा ने किया। यह नाटक स्त्री-पुरुष संबधों पर आधारित है जिसमें नायिका एक ऐसे आदमी से प्यार करती है जो शादीशुदा है और जिसकी एक बच्ची भी है। इसमें संबंधों के ताने-बाने को कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय के माध्यम से बारीकी से उकेरा। मुख्य भूमिका में दक्षा शर्मा, मुनीश देव मोहन, सरिता हांडा और जय चौहान थे। प्रकाश परिकल्पना कश्मीर सिंह की जबकि सेट डिजाइन वेद कुमार था।
हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंग मंडल द्वारा एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति “ब्यूटी पार्लर” का मंचन किया गया। यह सुप्रसिद्ध लेखिका रेखा वशिष्ठ द्वारा लिखित कहानी पर आधारित है जिसका सशक्त नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन सीमा शर्मा द्वारा किया गया।
यह कथा एक ऐसे व्यक्ति के जीवन को केंद्र में रखती है, जो ब्यूटी पार्लर संचालित करता है। दूसरों के चेहरे संवारते-संवारते वह स्वयं अपनी जीवन-यात्रा के आकर्षण, संवेदनाओं और निजी सपनों से दूर होता चला जाता है। बाहरी सौंदर्य के पीछे छिपे आंतरिक संघर्ष, सामाजिक दिखावे और मानवीय अकेलेपन को नाटक ने अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थपरक ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। दर्शकों को यह प्रस्तुति समाज के उस द्वंद्व से रूबरू कराती है, जहाँ व्यक्ति दूसरों के जीवन में चमक भरते-भरते स्वयं भीतर से खाली होता जाता है।
मुख्य भूमिका में कश्मीर सिंह ने “ब्यूटी पार्लर” के पात्र को अत्यंत जीवंत और प्रभावपूर्ण ढंग से निभाया। हसन – सीमा, मिसेज भार्गव – पूजा चक्रवर्ती, उर्वशी -रिया, बेबी- कामाक्षी, लड़की -प्रीति सूत्रधार के रूप में सचिन, सोफी मैडम- भारती, प्रकाश- दीप कुमार तथा संगीत संयोजन – सचिन द्वारा किया गया। कलाकारों की सामूहिक ऊर्जा और निर्देशक की सूक्ष्म दृष्टि ने दर्शकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखा।
इसके अतिरिक्त संवाद युवा मंडल की ओर से “अधूरे पन्नेः यादों की चौखट” का भी प्रभावी मंचन किया गया। मनजीत मन्ना के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक उन बुजुर्गों की अंतहीन प्रतीक्षा की कहानी है, जो अपनों के बिछड़ने के बाद भी एक ‘अंतिम उम्मीद’ के सहारे जी रहे हैं। हर दिन बीतता है, पन्ने पलटते हैं, पर घर लौटने की चाहत आज भी वहीं ठहरी हुई है।
इन नाट्य प्रस्तुतियों के चलते संस्कृति सदन कांगनीधार रंगमंचीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना है। विविध विषयों पर आधारित इन सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कला और संस्कृति से जुड़ने का विशेष अवसर प्रदान किया।
इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी, रंगकर्मी रूप उपाध्याय सहित कुलदीप गुलेरिया व अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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