100 साल पुराने बॉयज स्कूल पर चला “विलय का बुलडोजर”, सरकार के फैसले पर भड़का कुनिहार

कुनिहार। शिक्षा विभाग के 18 फरवरी के आदेश के बाद बॉयज सेकेंडरी स्कूल कुनिहार को गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल उच्चागांव में मर्ज करने के फैसले ने पूरे क्षेत्र में उबाल ला दिया है। करीब 100 साल पुराने ऐतिहासिक विद्यालय के अस्तित्व पर संकट मंडराने से लोगों में गहरा आक्रोश है। कुनिहार विकास सभा ने इसे “शिक्षा के साथ अन्याय” और “जनभावनाओं की अनदेखी” करार दिया है।

सभा के प्रधान धनीराम तनवर ने कहा कि जिस विद्यालय ने पीढ़ियों का भविष्य संवारा, उसी को समाप्त करने जैसा निर्णय लेना सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बॉयज सेकेंडरी स्कूल करीब 6–7 बीघा भूमि पर स्थापित है और यहां विज्ञान ब्लॉक सहित सभी आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके विपरीत उच्चागांव स्थित गर्ल्स स्कूल सीमित भूमि पर संचालित हो रहा है। ऐसे में संसाधनयुक्त और विशाल परिसर वाले विद्यालय को छोटे परिसर में समेटना पूरी तरह अव्यावहारिक और शिक्षा विरोधी कदम है।

विकास सभा का कहना है कि सामान्यतः नए संस्थानों को पुराने व सुसज्जित संस्थानों में समायोजित किया जाता है, लेकिन यहां उल्टा कदम उठाकर 100 साल पुराने स्कूल को लगभग 15 वर्ष पूर्व स्थापित संस्थान में विलय करने का आदेश जारी कर दिया गया। इसे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है।

संयुक्त बयान में भागमल तनवर, बाबूराम तनवर, ज्ञान ठाकुर, दीप राम ठाकुर, जगदीश ठाकुर, नागेंद्र ठाकुर, देवी राम मेहता, धर्म सिंह, सनी राघव, ओम प्रकाश ठाकुर, अनिल वर्मा, राजेश ठाकुर, संतराम, बलबीर चौधरी, मोहन सिंह चौधरी, प्रेम राज चौधरी समेत अन्य पदाधिकारियों ने सरकार पर क्षेत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि आदेश तुरंत वापस नहीं लिया गया तो तीनों पंचायतों के लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

इस मुद्दे पर कुनिहार की कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने भी खुलकर समर्थन दिया है। राम लीला जन कल्याण समिति कुनिहार, प्राचीन ठाकुरद्वारा प्रबंधन समिति हाटकोट, युवा विकास समिति कुनिहार, दोनों देवता जन कल्याण समिति, शिव तांडव गुफा कुनिहार, पेंशन एसोसिएशन कुनिहार, हिमाचल पथ परिवहन सेवा निवृत कर्मचारी कल्याण मंच अर्की इकाई, सर्व एकता मंच कुनिहार तथा नव चेतना एनजीओ कुनिहार सहित अन्य संगठनों ने निर्णय को जनविरोधी बताया है।

वहीं महिला शक्ति भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गई है। महिला मंडल कोठी, महिला मंडल हाटकोट, महिला मंडल नमोल, महिला मंडल हरिपुर, महिला मंडल दुकाडी, महिला मंडल बनिया, महिला मंडल बड़ोरी तथा महिला मंडल ऊंचा गांव ने भी सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है।

विकास सभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते आदेश रद्द नहीं किया तो धरना-प्रदर्शन से लेकर व्यापक जनआंदोलन तक की रणनीति बनाई जाएगी। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र की शिक्षा, विरासत और सम्मान का प्रश्न है, जिस पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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