#भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत की राह आसान नहीं दिख रही। सीटों के लिए भाजपा-कांग्रेस से टिकट के कई तलबगार हैं।*

#भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत की राह आसान नहीं दिख रही। सीटों के लिए भाजपा-कांग्रेस से टिकट के कई तलबगार हैं।*

Winning assembly elections not cake walk for BJP and Congress candidates in Solan

 #खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

 18 अक्टूबर 2022

 इस बार विधानसभा चुनावों में टिकट के चाहवानों की लंबी लिस्ट के चलते भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत की राह आसान नहीं दिख रही। जिले के पांचों सीटों के लिए भाजपा-कांग्रेस से टिकट के कई तलबगार हैं।
मुख्य दलों को खतरा सता रहा है कि ये बगावत कर चुनावों में हुंकार भर सकते हैं। दोनों दलों के पास बागियों की लंबी लिस्ट है जो विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदार जताते आए हैं। जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में सीधे तौर बागी पार्टी प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसमें भाजपा को तीन विधानसभा क्षेत्रों में नुकसान हो सकता है, वहीं कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बज रही है। हालांकि अभी तक भाजपा ने टिकट फाइनल नहीं किए हैं। कांग्रेस की तस्वीर साफ है। ऐसे में भीतरघात का खतरा दोनों दलों पर मंडरा रहा है। टिकट तय होते ही खुलकर भीतरघात सामने आ जाएगा जिसे चुप करवाना पार्टी पदाधिकारियों के लिए भी मुश्किल होगा।
भाजपा के लिए कहां बिगड़ेंगे समीकरण
जिले में भाजपा की राह भी मुश्किल में नजर आ रही है। भाजपा के लिए अर्की, नालागढ़ और सोलन विधानसभा क्षेत्र में दो से तीन उम्मीदवार दावेदारी जता रहे हैं। सोलन में पूर्व प्रत्याशी राजेश कश्यप के अलावा तरसेम भारती भी टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। यहां पर महिला का नाम भी टिकट की लिस्ट में चल रहा है।

इसी तरह अर्की में पिछले दो विधानसभा चुनावों में पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा भी टिकट आवंटन पर तल्खी जता चुके हैं। हालांकि बाद में उन्हें मना लिया गया लेकिन पार्टी यहां से सीट हार गई थी। यहां पर महिला जिला परिषद सदस्य भी टिकट के लिए दावेदारी जता रही हैं। नालागढ़ में लखविंद्र राणा के भाजपा में आने के बाद केएल ठाकुर खुलकर अपना दावा जता रहे हैं। मुख्यमंत्री की जनसभा में दोनों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया था।
कांग्रेस के लिए भी नहीं राह आसान
कांग्रेस का भीतरघार भी छुपा नहीं है। कांग्रेस के लिए कसौली, नालागढ़ और अर्की में मुश्किल बढ़ सकती है। सबसे ज्यादा परेशानी कसौली सीट से कांग्रेस को आ सकती है। यहां पर भीतरघात ही कांग्रेस को तीन बार हरा चुका है। इस बार यहां से सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार ध्यान सिंह टिकट की दावेदारी जता चुके हैं। उन्हें टिकट मिलना मुश्किल है। ऐसे में कांग्रेस के लिए परेशानी बढ़ना तय है। साथ ही अर्की में कांग्रेस के बागी राजेंद्र ठाकुर बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। जो कांग्रेस को मुश्किल में डाल सकती है। नालागढ़ में बावा हरदीप सिंह को टिकट मिलता है तो उन पर बाहरी का तमगा लगा है। कांग्रेस के कई स्थानीय उम्मीदवार उनके खफा हैं।
पहले भी भाजपा तीन सीटों पर देख चुकी हैं हार
जिले में 2017 के चुनाव में भी भाजपा को तीन सीटों पर हार देखनी पड़ी थी। इसमें सोलन, अर्की और नालागढ़ सीट कांग्रेस की झोली में गई था। हालांकि अर्की में उपचुनाव में भी भाजपा की दोबारा हार हुई थी। उपचुनाव में कई राष्ट्रीय नेताओं ने अर्की में डेरा जमाया था। इसके बावजूद भाजपा अपनी सीट नहीं बचा सकी थी। भीतरघात ने ही भाजपा को हरा दिया था। इस बार भी अर्की में भाजपा के लिए राहें आसान नजर नहीं आ रही है। यहां पर दो से तीन उम्मीदवार अपनी दावेदारी जता चुके हैं।

 #खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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