#यूपी के इस जिले में बल्लियों से जुगाड़ कर बना मौत का पुल, जरा सी चूक पर जिंदगी हो जाएगी खत्म*

bridge of death made by juggling with bats

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

15 नवंबर 2022

देश की राजधानी दिल्ली में फ्लाईओवर और फुट ओवर ब्रिज की बाढ़ है। इन्हीं के सहारे दिल्ली ने तरक्की के कई कीर्तिमान बनाए लेकिन राजधानी दिल्ली से महज 35 किलोमीटर दूर बागपत में एक ऐसा पुल है जिसे लोग मौत का पुल कहते हैं। यदि जरा सी भी चूक हुई तो जिंदगी खत्म। जिन लोगों से चूक हुई वो इस दुनिया में नहीं रहे। यहां के लोगों ने भी वोट दी और सांसद चुनकर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानि संसद में भेजे। दावे और वादों के बीच यहां के लोगों की जिंदगी इस पुल के बीच मंडरा रही है।

जानकारी मुताबिक बागपत के बिनौली ब्लाॅक के इस रहतना गांव के लोगों की जिंदगी कुछ इसी तरीके से मौत के सफर से होकर गुजरती है। यहां पर दो बल्लियों के सहारे गांव के लोगों ने जुगाड़ करके जैसे-तैसे पुल बना लिया। जुगाड़ तो जुगाड़ होता है… ये जुगाड़ कब धोखा दे जाए, ये इसे बनाने वालों को भी नहीं पता है। हर पल यहां मौत झपट्टा मारने के लिए तैयार रहती है, क्योंकि जैसे ही पुल पर कोई शख्स चलता है तो पुल हिचकौले लेने लगता है। ऐसे वक्त में यदि जरा सी भी चूक हुई तो आप सीधे कृष्णी नदी में जा गिरेंगे और यहां का गहरा पानी आपको बचने का भी मौका नहीं देगा। यहां सबसे बड़ी बात ये है कि पानी के उपर जंगली घांस है, जिससे पुल के नीचे अंजान आदमी ये भी अंदाजा नहीं कर सकता कि आखिर यहां पानी कितना गहरा होगा। हां पूरी बल्ली पानी में डूबी नजर आ रही है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कम से कम 20 फीट से उपर पानी तो होगा ही। इस जुगाड़ के पुल से गिरकर कई बच्चे मर चुके हैं, इसलिए जब तक बच्चे घर नहीं लौट आते तब तक परिवार के लोगों को डर सताता रहता है।

आपको बता दें कि, रहतना गांव के ज्यादातर किसानों के खेत गांव से दूसरी तरफ हैं। वहां तक जल्दी जाने का यही जुगाड़ है। यदि गांव के किसानों को कुछ सामान खरीदने के लिए बाजार जाना पड़ता है तो उन्हें कई किलोमीटर दूर का सफर तय करना पड़ता है और वापिस लौटने में भी उतना ही समय लगेगा। वक्त को बचाने के लिए रहतना गांव के लोग अपनी जिंदगी ही दाव पर लगा देते हैं।अकेले रहतना ही नहीं बल्कि आस-पास के आधा दर्जन गांव इससे प्रभावित होते हैं। दादरी, बिनौली, रहतना, रंछाड़, दाह, पुसार गांव के लोगों को मजबूरी में यही से आना-जाना पड़ता है। गंव के लोग चाहते है कि यहां एक स्थायी पुल बना दिया जाए । लेकिन ये ग्रामीणों को सरकार और जिला प्रशासन से कई साल से आस है कि एक दिन यहां पुल जरूर बनेगा। अभी ना तो ग्राम प्रधान ध्यान देता है, ना जिला प्रशासन ना सरकार लेकिन इतना जरूर है कि प्रशासन नींद से उस वक्त जरूर जागेगा जब यहां किसी दिन गुजरात जैसा कोई बड़ा हादसा हो जाएगा ।

जहां हर कदम पर मौत से होता है सामना  जहां जरा सी चूक ले लेती है जान…जहां कदम डगमगाने के साथ ही जिंदगी भी डगमगाने लगती है…जिनके कदम डगमगाए वो इस दुनिया में नहीं रहे…ये पुल ले चुका है कई लोगों की जान…लोग इसे कहते हैं मौत का पुल

Share the news