AIIMS Bilaspur: घुटने-कंधे की सर्जरी में दर्द और खर्च कम, रिकवरी होगी तेज, एम्स में मिलेगी अत्याधुनिक सुविधा

हिमाचल प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एम्स बिलासपुर हर दिन अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। संस्थान के ऑर्थोपेडिक (हड्डी एवं जोड़) विभाग को अत्याधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी सिस्टम से लैस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब चार करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह सिस्टम मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भरता से मुक्त करेगा और प्रदेश में ही विश्वस्तरीय जोड़ सर्जरी उपलब्ध कराएगा। अब तक गंभीर घुटने, कंधे और टखने की सर्जरी के लिए मरीजों को चंडीगढ़, दिल्ली या अन्य महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, जिससे समय, पैसा और शारीरिक कष्ट तीनों बढ़ जाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह मजबूरी इतिहास बन जाएगी। आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी को आम भाषा में की-होल सर्जरी कहा जाता है।
इसमें जोड़ को खोलने के बजाय एक बेहद छोटे छेद के माध्यम से हाई-डेफिनिशन कैमरा और सूक्ष्म उपकरण डालकर सर्जरी की जाती है। यह तकनीक विकसित देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है और अब एम्स बिलासपुर के जरिए हिमाचल के मरीजों को भी इसका सीधा लाभ मिलने जा रहा है। पारंपरिक सर्जरी में जहां बड़े चीरे, ज्यादा रक्तस्राव और लंबा रिकवरी समय होता था, वहीं आर्थ्रोस्कोपी में शरीर को न्यूनतम नुकसान,कम दर्द और सूजन,संक्रमण की आशंका बेहद कम,जल्दी चलने-फिरने की सुविधा जैसे बड़े फायदे मिलते हैं।

छोटा चीरा होने से तेज दर्द नहीं होता
छोटा चीरा होने के कारण ऑपरेशन के बाद होने वाला तेज दर्द लगभग समाप्त हो जाता है। मरीज सामान्य दर्द निवारक दवाओं से ही सहज महसूस करता है। अधिकांश मामलों में मरीज को 24 से 48 घंटे के भीतर छुट्टी दी जा सकेगी, जबकि पहले हफ्तों तक भर्ती रहना पड़ता था। ऑफिस जाने वाले, किसान, महिलाएं और बुजुर्ग सभी के लिए यह तकनीक वरदान साबित होगी, क्योंकि लंबा बेड रेस्ट जरूरी नहीं रहेगा।

आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी इन चोटों के लिए भरोसेमंद
खेल गतिविधियों के दौरान होने वाली एसीएल, पीसीएल, मेनिस्कस और रोटेटर कफ जैसी चोटें युवाओं और खिलाड़ियों के कॅरियर के लिए सबसे बड़ा खतरा होती हैं। आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी इन चोटों के इलाज में सबसे सटीक और भरोसेमंद मानी जाती है। एम्स में यह सुविधा शुरू होने से राज्य के उभरते खिलाड़ियों को बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी और उनका इलाज समय पर संभव हो सकेगा।

एचडी कैमरे से जोड़ के भीतर की हर नस पर नजर
इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता है इसका हाई-डेफिनिशन कैमरा सिस्टम, जिससे सर्जन जोड़ के अंदर की संरचना को बड़ी स्क्रीन पर स्पष्ट देख सकेंगे। क्षतिग्रस्त हिस्से की सटीक पहचान कर सकेंगे। आसपास की नसों और मांसपेशियों को सुरक्षित रख सकेंगे। इससे सर्जरी की सफलता दर और मरीज की सुरक्षा दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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