Himachal: एम्स बिलासपुर में मायोसाइटिस जैसी घातक बीमारियों के टेस्ट हो सकेंगे, लोगों को मिलेगी राहत

हिमाचल प्रदेश के उन हजारों मरीजों के लिए राहत भरी खबर है, जो मांसपेशियों और त्वचा से जुड़ी रहस्यमयी बीमारियों के इलाज के लिए चंडीगढ़, दिल्ली या जालंधर के निजी अस्पतालों के चक्कर काटते थे।
एम्स बिलासपुर के क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रुमेटोलॉजी विभाग ने इन जटिल बीमारियों को जड़ से पकड़ने के लिए अत्याधुनिक लाइन इम्यूनो एसे किट की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। मायोसाइटिस, सिस्टमिक स्केलेरोसिस जैसी घातक बीमारियों के 150 विशिष्ट टेस्ट प्रोफाइल जल्द ही विभाग में उपलब्ध होंगे। इससे जांच के खर्च में 70 से 80 फीसदी तक की कमी आएगी।

मरीजों को सटीक रिपोर्ट के लिए भी हफ्तों का इंतजार नहीं करना होगा। अभी तक प्रदेश में इन बीमारियों के लक्षण जैसे अचानक मांसपेशियों में कमजोरी या त्वचा का सख्त होना, दिखने पर डॉक्टरों को निदान के लिए अलग-अलग टेस्ट करवाने पड़ते थे।
एम्स की ओर से मंगवाई जा रही नई एलआईए किट की खासियत यह है कि इसमें एक ही स्ट्रिप (पट्टी) पर 15 से ज्यादा एंटीजन मौजूद होते हैं। यानी एक ही बार खून का सैंपल देने पर शरीर के भीतर छिपे 15 से ज्यादा खतरनाक संकेतकों (एंटीबॉडीज) का पता चल जाएगा।
बताया जा रहा कि निजी लैब में इन टेस्ट के लिए मरीजों को 8 से 12 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। इसके बाद भी सैंपल दिल्ली भेजे जाते थे, जिसकी रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन लगते थे। एम्स में यह सुविधा शुरू होने से सरकारी रेट होने के कारण टेस्ट की कीमतें बेहद कम होंगी। 10 दिन के बजाय मात्र 48 से 72 घंटे में रिपोर्ट मिल जाएगी। किट से इन साइलेंट किलर बीमारियों जैसे मायोसाइटिस, इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी ही मांसपेशियों पर हमला कर देती है, जिससे मरीज इतना कमजोर हो जाता है कि उसका उठना-बैठना और चलना भी दूभर हो जाता है।

सिस्टमिक स्केलेरोसिस, इसे पत्थर बनाने वाली बीमारी भी कहते हैं। इसमें त्वचा, खून की नसें और फेफड़े जैसे अंदरूनी अंग पत्थर की तरह सख्त होने लगते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है की समय पर पहचान कर इलाज शुरू होगा।
जल्दी पकड़ में आ जाएगी बीमारी
अक्सर पहाड़ के दूरदराज इलाकों के मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एम्स की यह नई तकनीक न केवल बीमारी पकड़ेगी, बल्कि यह भी पहले ही बता देगी कि संक्रमण दिल या फेफड़ों की ओर तो नहीं बढ़ रहा। इससे इलाज जल्ग शुुरू हो सकेगा।

Share the news