Himachal: शहरी क्षेत्रों में पानी की दरें बढ़ाने की तैयारी, जल शक्ति विभाग ने दी प्रस्तुति

हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पानी महंगा हो सकता है। प्रदेश सचिवालय में सचिव शहरी विकास देवेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति के लिए पानी की दरों में वृद्धि संबंधी प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में शहरी विकास विभाग और जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने बढ़ती लागत, रखरखाव व्यय और शहरी जल प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुति दी। सूत्रों के अनुसार सरकार वित्तीय भार और जल सेवाओं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए दरों में संशोधन पर विचार कर रही है।
प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में लिया जा सकता है। प्रदेश सरकार मंत्रिमंडल की बैठक में यदि दरों में वृद्धि को मंजूरी देती है तो इसका प्रभाव प्रदेश के शहरी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जल शक्ति विभाग के पाइपों की आवश्यकता की समीक्षा के लिए शुक्रवार को राज्य स्तरीय प्री-स्क्रीनिंग समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जल शक्ति विभाग के सचिव अभिषेक जैन ने की। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्री की मांग, उपलब्ध बजट तथा प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। अभिषेक जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रस्तावित कार्यों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

केंद्र की शर्त, कम से कम 100 रुपये हो मासिक शुल्क
उधर, बीते दिनों विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा था कि केंद्र सरकार ने शर्त लगाई है कि जल जीवन मिशन का शेष बजट चाहिए तो निशुल्क पानी सप्लाई नहीं देना होगी। मंत्रालय का कहना है कि कम से कम 100 रुपये का मासिक बिल लिया जाए। आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग से 30 रुपये बिल लेने को कहा है। इसके अलावा टैंक से आगे पानी की सप्लाई देने का काम भी पंचायतीराज विभाग को देने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह सभी मामले सरकार के विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में मिशन के तहत हिमाचल को 6,395 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। इसमें से 5,167 करोड़ प्राप्त हुए। करीब 1,227 करोड़ नहीं मिले थे। 1,747 स्कीमें मंजूर हुई थीं। 1,100 स्कीमें चल रही हैं। पूर्व की राज्य सरकार ने केंद्र को लिखकर दे दिया कि प्रदेश में मिशन पूरा हो चुका है। इस कारण 1,227 करोड़ नहीं मिले। जब मंत्रालय के समक्ष लंबित राशि का मामला उठाया गया तो नई शर्तों का पालन करने को कहा गया।

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