
हिमाचल प्रदेश के इदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज और जिला सिरमौर के डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पीजी के जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों को प्रदेश सरकार के वार्षिक बजट 2026-27 से स्टाइपेंड में वृद्धि किए जाने की आस है। आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज व नाहन मेडिकल कॉलेज के करीब आठ सौ से अधिक जूनियर रेजिडेंट ही अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्ड और ओपीडी में कंसलटेंट चिकित्सकों के साथ अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार समय से करने में सक्रिय रूप से अपनी भूमिका का निभाते हैं। इनके योगदान को देखते हुए ही आरडीए आईजीएमसी के प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्टीमुलस 2025 में उठाई गई स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को मानते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंच से बाकायदा घोषणा भी की थी।
फरवरी माह में आईजीएमसी आरडीए के अध्यक्ष डॉ. सोहिल शर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. मधुप अरोड़ा,कोषाध्यक्ष डॉ. आशिमा शर्मा और महिला प्रतिनिधि डॉ. अनन्या श्री का प्रतिनिधिमंडल इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिला था। इस पर मुख्यमंत्री ने सरकार के बजट में स्टाइपेंड को बढ़ाने को शामिल करने का भरोसा दिया था। डॉ. सोहिल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिले आश्वासन के बाद सभी जूनियर रेजिडेंट पीजी छात्रों को पूरा भरोसा है कि सरकार इस बार के बजट में उनकी इस मुख्य मांग को पूरा करेगी। इसके साथ ही सरकार समय से स्टाइपेंड का भुगतान जूनियर रेजिडेंट को किए जाने को सुनिश्चित करेगी। डाॅ. सोहिल शर्मा और डॉ. मधुप अरोड़ा ने बताया कि आरडीए लगातार जूनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड को बढ़ाने की मांग सरकार से कर रही है।
जूनियर रेजिडेंट प्रथम वर्ष के स्टाइपेंड को 40 से बढ़ाकर 50 हजार, द्वितीय वर्ष के जूनियर रेजिडेंटे के स्टाइपेंड को 45 से 60 और तृतीय वर्ष के जूनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड को 50 से बढ़ाकर 65 हजार करने की मांग सरकार से की गई है। उन्होंने कहा कि बढ़ी महंगाई के चलते शिमला जैसे शहर में जूनियर रेजिडेंट को 50 हजार में गुजारा करना मुश्किल हो रहा है, इसमें मकान का किराया, बिजली-पानी का खर्च, अन्य खर्चे पूरा करना मुश्किल हो रहा है। पड़ाेसी राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में पहले ही जूनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड को बढ़ा दिया गया है, मगर प्रदेश में इसमें कोई वृद्धि नहीं हो रही है। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी पीजी कोर्स शुरू किये जाने की योजना है, इसमें अधिक से अधिक चिकित्सक प्रदेश लें इसके लिए उन्हें पीजी में दिए जाने वाले स्टाइपेंड में वृद्धि करना जरूरी है।





