
हिमाचल प्रदेश शिक्षा निदेशालय ने हाईकोर्ट के आदेश पर सभी जिला उप निदेशकों को टीजीटी शिक्षकों को अनुबंध अवधि का संशोधित वेतनमान देने के निर्देश जारी किए हैं। यह लाभ सरकार की ओर से 12 जनवरी 2022 को जारी अधिसूचना के तहत दिया जाएगा। इसके अनुसार अनुबंध कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का 60 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
रमेश चंद टीजीटी नॉन-मेडिकल, महावीर सिंह और गुरनाम सिंह सहित कई शिक्षकों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा घनश्याम दास, रेखा कौंडल और संतोष कुमार के मामलों में भी अनुबंध अवधि का संशोधित वेतनमान देने के आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ एलपीए (लेटर पेटेंट अपील) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
एलपीए में अंतिम फैसला आने के बाद ही मामले का अंतिम निपटारा होगा। शिक्षकों ने अपनी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से संशोधित वेतनमान देने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। शिक्षकों का तर्क था कि उन्हें संशोधित वेतनमान 2016 से लागू नियमों के अनुसार मिलना चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित शिक्षक वर्ष 2014 से 2019 के बीच अनुबंध आधार पर नियुक्त हुए थे और बाद में नियमित किए गए। उन्होंने नियुक्ति तिथि से संशोधित वेतनमान देने की मांग की थी।
उधर, शिक्षा निदेशालय ने तीन टीजीटी शिक्षकों की पे-स्टेपअप की मांग खारिज कर दी है। इसमें दिनेश कुमार, परवीन कुमार और महेश कुमार शर्मा ने अपने कनिष्ठ कर्मचारी के बराबर वेतन निर्धारित करने की मांग की थी। जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों को सेवा के पहले 14 वर्षों में तीन वित्तीय लाभ मिल चुके हैं, इसलिए वे अतिरिक्त लाभ के पात्र नहीं हैं।
सरकारी स्कूलों के लंबित कार्यों के लिए 1.22 करोड़ रुपये जारी
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चल रहे निर्माण और प्राथमिकता के कार्यों को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अव्ययित (अनस्पेंट) बजट से 1.22 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा के सरकारी विद्यालयों में विभिन्न लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए दी गई है।
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के अनुसार कुल 1 करोड़ 22 लाख 85 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि शिमला, सिरमौर, मंडी, चंबा और बिलासपुर जिलों के स्कूलों में चल रहे प्राथमिकता वाले कार्यों पर खर्च की जाएगी। निदेशालय ने संबंधित उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत राशि से प्रस्तावित कार्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार तुरंत शुरू किए जाएं।
कार्यों की प्रगति की नियमित रिपोर्ट निदेशालय को भेजनी होगी। जारी धनराशि से सरकारी स्कूलों में भवन मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष निर्माण, बुनियादी सुविधाओं के सुधार तथा अन्य आवश्यक कार्य किए जाएंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्य निर्धारित कार्यान्वयन एजेंसी के माध्यम से ही करवाए जाएंगे और सभी औपचारिकताओं का पालन अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कार्य पूरा होने के बाद संबंधित विद्यालयों और अधिकारियों को तुरंत उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाणपत्र (यूसी) निदेशालय को भेजना होगा। इसके आधार पर कार्यों की निगरानी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
विभाग के अनुसार स्वीकृत राशि संबंधित उपनिदेशकों के बैंक खातों में जमा कर दी गई है। साथ ही संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और भौतिक व वित्तीय प्रगति की जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए।





