
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का रास्ता साफ हो चुका है। प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश वापस ले लिए हैं। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन सेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब राज्य में कनेक्टिविटी की स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है, इसलिए पहले जारी आदेश को लगभग 6 महीने बाद वापस ले लिया गया है। बता दें कि हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश सरकार ने सभी उपायुक्तों को रोस्टर प्रक्रिया संबंधी विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। 20 मार्च से जिलों में रोस्टर निर्धारण का कार्य शुरू होगा, जबकि 30 मार्च तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
31 मार्च को उपायुक्त अपने अपने जिलों के पंचायतीराज संस्थाओं के रोस्टर जारी कर देंगे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नई बनने वाली पंचायतों और पुनर्सीमांकन से प्रभावित पंचायतों में आरक्षण का निर्धारण तय नियमों के तहत किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों से जनसंख्या आंकड़े, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग का अनुपात आधार बनाया जाएगा।
उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। प्रदेश में 84 नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। नई पंचायतों के गठन से कई मौजूदा पंचायतों की सीमाओं में बदलाव हुआ है, जिसके चलते रोस्टर निर्धारण का कार्य और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में 31 मई से पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों में तेज कर दी हैं। रोस्टर फाइनल होने के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का रास्ता साफ हो जाएगा। माना जा रहा है कि अप्रैल के मध्य तक चुनाव प्रक्रिया की औपचारिक अधिसूचना जारी हो सकती है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक तैयारियां जोरों पर हैं।





