
भारत सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से तीन नई योजनाएं शुरू की हैं। इनके तहत बिना जमानत और बिना गारंटर के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय के अनुसार प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के तहत विद्यार्थियों को बिना किसी कोलेटरल और गारंटर के शिक्षा ऋण लेने की सुविधा दी गई है। इस योजना के अंतर्गत ऐसे विद्यार्थी, जिनके परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है, उन्हें दस लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर तीन प्रतिशत व्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। शिक्षा निदेशक ने सभी जिला उपनिदेशकों को पत्र जारी कर इन योजनाओं से पात्र विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पीएम-यूएसपी सीएसआईएस (प्रधानमंत्री ब्याज सब्सिडी योजना) के तहत भी विद्यार्थियों को विशेष लाभ दिया जा रहा है।
मोरेटोरियम अवधि में पूरा ब्याज देगी केंद्र सरकार
योजना के तहत चार लाख पचास हजार तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्रों को भारत के मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रोफेशनल और तकनीको पाठ्यक्रमों के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर मोरेटोरियम अवधि के दौरान पूरा ब्याज केंद्र सरकार वहन करेगी। यह सुविधा दस लाख तक के शिक्षा ऋण पर उपलब्ध है। निदेशालय ने बताया कि क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन के माध्यम से भी छात्रों को राहत दी जा रही है। योजना के तहत सात लाख पचास हजार रुपये तक के शिक्षा ऋण पर सरकार 75 प्रतिशत तक की गारंटी कवर प्रदान करती है। इससे छात्रों को बिना कोलेटरल सिक्योरिटी और बिना तीसरे पक्ष की गारंटी के भी शिक्षा ऋण प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।
जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाएं : शर्मा
उच्य शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने छात्रों से अपील की है कि वे इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाएं। विद्यार्थियों को अपने आवेदन ऑनलाइन माध्यम से जमा करने की सुविधा भी दी गई है। विस्तृत दिशा-निर्देश और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी pmvidyalaxmi.co.in तथा शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट education.gov.in पर उपलब्ध है। निदेशक ने कहा कि शिक्षा ऋण और ब्याज सब्सिडी से संबंधित योजनाओं के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाना आवश्यक है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इनका लाभ उठाकर अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें।





