
विधायकों के फोन नहीं सुनने वाले अफसरों पर अब विधानसभा के नियमों के तहत कार्रवाई होगी। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने अफसरशाही की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मेरा दिमाग सरका तो… लोगों के साथ मिलकर ऐसे अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर धरना दूंगा। मुख्यमंत्री से ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए फोन भत्ता वापस लेने का आग्रह भी किया। उधर, विस अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि फोन न सुनने वाले अधिकारियों के नाम लिखकर दें, आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रश्नकाल के दौरान गगरेट से विधायक राकेश कालिया ने कहा कि जनता के काम के लिए भी अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते।
अधिकारियों की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वह बाद में वापस कॉल भी नहीं करते। उन्होंने अधिकारियों के इस रवैये को मनमाना करार दिया। उन्होंने कहा कि गगरेट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाडी के भवन निर्माण के लिए भूमि का चयन करने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे, लेकिन अफसर काम ही नहीं कर रहे। ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उधर, सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने भी कालिया के इस बयान का मेज थपथपाकर समर्थन किया। कालिया ने कहा कि जब अधिकारी फोन ही नहीं सुनते तो उन्हें सरकार की ओर से जो भत्ता दिया जा रहा है, उसे बंद कर देना चाहिए। इससे पहले विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के विधायक और मंत्री तक अधिकारियों की मनमानी और फोन न सुनने का मामला उठा चुके हैं। विस अध्यक्ष ने मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इस पर तुरंत गौर करने की जरूरत है। उन्होंने राकेश कालिया को ऐसे अधिकारियों के नाम लिखकर विधानसभा सचिवालय को देने को कहा।
मंत्री विक्रमादित्य और गोमा भी उठा चुके हैं सवाल
अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा भी बीते दिनों सवाल उठा चुके हैं। अब राकेश कालिया ने सदन में इस मामले को उठाकर अफसरशाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है।





