
हिमाचल प्रदेश में सरकारी सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों की चयन प्रक्रिया पर गुरुवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। संयुक्त शिक्षक संघ की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी। इस मामले में होने वाले फैसले पर प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं। इसी प्रक्रिया के तहत 22 मार्च को प्रस्तावित परीक्षा आयोजित होनी है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के चयनित सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू करने के लिए सेवारत शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए थे। इस प्रक्रिया के तहत करीब 5600 पदों के लिए लगभग 12 हजार शिक्षकों ने आवेदन किया है। चयन के लिए लिखित परीक्षा आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया गया है। संयुक्त शिक्षक संघ ने चयन प्रक्रिया के कुछ प्रावधानों और परीक्षा प्रणाली को लेकर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
परीक्षा चयन का आधार नहीं होना चाहिए: याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परीक्षा चयन का आधार नहीं होना चाहिए। हालांकि याचिका दायर करने वाले कई शिक्षक स्वयं भी इस भर्ती प्रक्रिया के आवेदक हैं। याचिका में चयन के मानदंडों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। ऐसे में गुरुवार को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 22 मार्च को प्रस्तावित परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार होगी या चयन प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाएगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि सीबीएसई पैटर्न पर आधारित स्कूलों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत चयनित शिक्षकों को इन स्कूलों में तैनात किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
कठिन क्षेत्रों में काम कर चुके शिक्षकों का स्थानांतरण करना सरकार की जिम्मेदारी
वहीं प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी कठिन या जनजातीय क्षेत्र में अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लेता है, तो उसे वहां से स्थानांतरित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो इन क्षेत्रों में नियुक्ति को सजा के रूप में देखा जाने लगेगा। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा है कि यदि कर्मचारियों को यह भरोसा नहीं होगा कि कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका तबादला कर दिया जाएगा, तो कठिन क्षेत्रों में कोई भी स्वेच्छा से सेवा नहीं देना चाहेगा। समय पर स्थानांतरण न होने से इन क्षेत्रों में नियुक्तियों को पनिशमेंट पोस्टिंग माना जाने लगेगा। कठिन क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा करने वाले शिक्षकों का स्थानांतरण सजा नहीं, बल्कि अधिकार है।
न्यायालय ने 31 जनवरी के आदेश को रद्द करते हुए प्रतिवादी शिक्षा विभाग और सरकार को निर्देश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को उनके वर्तमान स्थान से स्थानांतरित कर किसी अन्य क्षेत्र में तैनात किया जाए और उनकी जगह किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति की जाए। वहीं अदालत में राज्य सरकार ने दलील दी कि याचिकाकर्ता का तबादला इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इससे उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि विभाग का यह रवैया मनमाना है। याचिकाकर्ता शिक्षक जो कि वर्तमान में मंडी जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कठोग में तैनात हैं। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने इस कठिन क्षेत्र में अपना सामान्य कार्यकाल पूरा कर लिया है, फिर भी विभाग ने 31 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी कर उनके तबादले के अनुरोध को खारिज कर दिया था। याची ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अदालत में यह फैसला दिया है।





