
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हायर ग्रेड पे से संबंधित लाभ वापस लेने वाली 6 सितंबर 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अधिसूचना कथित तौर पर कर्मचारियों के उच्च वेतनमान को प्रभावित कर रही थी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश अनिल गुलेरिया एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अवसर दिए जाने के बावजूद अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर प्रतिवादी सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह के अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी। वहीं, याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए भी चार सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। इस अधिसूचना से प्रभावित होने वाले हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने 6 सितंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम 2022 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पहले जोड़े गए नियम 7(ए) को हटा दिया। यह माना गया कि इसे 3 जनवरी 2022 से ही हटा दिया गया था। अधिसूचना के अनुसार इस वेतन निर्धारण के परिणाम में यदि किसी कर्मचारी को अधिक भुगतान हो गया है, तो उस अधिक भुगतान की कोई वसूली नहीं की जाएगी।
क्या था नियम 7(ए)
नियम 7(ए) उन कर्मचारियों के वेतन निर्धारण से संबंधित था, जिनकी नियुक्ति 3 जनवरी 2022 से पहले हुई थी। इसके तहत अनुसूची-दो में शामिल पदों पर दो साल की नियमित सेवा पूरी होने के बाद संबंधित पे मैट्रिक्स के उच्च वेतन चरण पर वेतन निर्धारित किया जाना था।
कर्मचारियों के विरोध के बीच लागू नहीं की थी अधिसूचना
कर्मचारियों के विरोध के बीच प्रदेश सरकार ने नए प्रावधान को लागू नहीं किया था। कर्मचारी संगठन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिले थे और उन्होंने नई अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अधिसूचना लागू न करने के निर्देश दिए थे। अब कोर्ट ने भी हायर ग्रेड पे के लाभ को वापस लेने देने वाली अधिसूचना पर रोक लगाई है। अधिसूचना के लागू होने से क्लर्कों समेत कई श्रेणियों का वेतन 8 से 10 हजार रुपये कम होना था।





