
इस बार स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय कठिन प्रश्नों का अनुपात बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की केवल किताबी रटंत विद्या को परखना नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता का सटीक मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। स्कूल शिक्षा बोर्ड मुख्यालय धर्मशाला में सोमवार को बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक में परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और छात्र-हितैषी बनाने के लिए कई क्रांतिकारी बदलावों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी बोर्ड परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए विशेषज्ञों से संवाद स्थापित करना और परीक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर ठोस मार्गदर्शन प्राप्त करना रहा।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि इस बार प्रश्नपत्रों को तैयार करते समय कठिन प्रश्नों का अनुपात बढ़ाया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इस बदलाव से मेधावी छात्रों की असली प्रतिभा निखरकर सामने आएगी और मूल्यांकन की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत किया जा सकेगा। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए बोर्ड ने फ्लाइंग स्क्वॉड (उड़नदस्तों) की भूमिका को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों पर तैनात शिक्षकों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, ताकि ड्यूटी के दौरान किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।
परीक्षा संचालन, गोपनीयता पर की गई चर्चा
बैठक में परीक्षा संचालन, गोपनीयता, अनुशासन और निगरानी व्यवस्था को और अधिक निष्पक्ष बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे आम जनता का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास और मजबूत हो सके। इस महत्वपूर्ण रणनीति को तैयार करने में शिक्षा, पुलिस और प्रशासनिक क्षेत्र के अनुभवी दिग्गजों ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में मुख्य रूप से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजिलेंस राजेंद्र जंवाल, कमलेश कुमारी (उप निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग), ओपी कालश (सेवानिवृत्त उप निदेशक), आरपी चोपड़ा (सेवानिवृत्त प्राचार्य) और डॉ. अशोक कुमार (केंद्रीय विश्वविद्यालय) सहित बोर्ड प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अध्यक्ष ने सभी विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर एक ऐसी परीक्षा व्यवस्था का आश्वासन दिया है जो पूरी तरह से पारदर्शी और छात्र-हितैषी होगी।





