
शिमला,
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में हाल ही में मंजूर की गई फीस वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे छात्र-विरोधी फैसला बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है।
SFI-HP के अनुसार, विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद (EC) ने 28 मार्च 2026 को रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी के प्रस्ताव पर विभिन्न कोर्सों में फीस बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके तहत परीक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी, हॉस्टल फीस में 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि और कई कोर्सों की फीस में कुल मिलाकर लगभग 25 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है। वहीं, Ph.D. थीसिस जमा करने और मूल्यांकन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा प्रोजेक्ट रिपोर्ट फीस में 200 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की गई है।
SFI ने आरोप लगाया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब छात्र और उनके परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं। संगठन का कहना है कि इससे गरीब और हाशिये पर मौजूद तबकों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा।
संगठन ने राज्य सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। SFI के अनुसार, बजट 2026-27 में HPU के लिए आवंटन 152 करोड़ रुपये से घटाकर 142 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है। साथ ही, सरकारी शिक्षण संस्थानों के बंद या मर्ज होने और निजी संस्थानों के बढ़ते प्रभाव को भी चिंता का विषय बताया गया।
SFI-HP ने कहा कि सरकार “रिसोर्स क्रंच” का हवाला देकर शिक्षा का बोझ छात्रों पर डाल रही है, जबकि जरूरत सार्वजनिक शिक्षा में निवेश बढ़ाने की है। संगठन ने इसे शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण का हिस्सा करार दिया।
SFI ने मांग की है कि फीस वृद्धि का फैसला तुरंत वापस लिया जाए, विश्वविद्यालय को पर्याप्त अनुदान दिया जाए और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
SFI-HP राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और राज्य सचिव सन्नी सेक्टा ने सभी छात्रों, शिक्षकों और लोकतांत्रिक संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।





