
खबर अभी अभी ब्यूरो
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ0 मदन कुमार ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्र में सड़क पर गलत व खतरनाक तरीके से ओवरटेक करना घातक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 90 प्रतिशत सड़क हादसे तेज गति से वाहन चलाने के कारण होते हैं। इनमें गलत तरीके से ओवरटेक करना एक बड़ा कारण है।
वे आज जिला परिषद सभागार, भ्यूली में सड़क सुरक्षा पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अधिकतर लोग सड़क सुरक्षा को अभी भी औपचारिकता मात्र समझते हैं, जबकि विश्व भर में प्रतिवर्ष 20 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां देते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा लगभग 1 लाख 25 हजार है यानि हर चार मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार होता है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां पर 95 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती है।यहां प्रतिवर्ष लगभग 3 हजार छोटी-बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें लगभग 1200 लोग अपनी जान खो देते हैं तथा लगभग 5 हजार लोग घायल होते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने, विभिन्न सड़क चिन्हों पर ध्यान देने और सड़क सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने पर इन दुर्घटनाओं का कम किया जा सकता है।
कार्यशाला में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी गिरीश समरा ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर लोगों को सड़क सुरक्षा पर आधारित वीडियो व नाटक इत्यादि के माध्यम से जागरूक किया जाता है। उन्होंने वाहनों का उचित रखरखाव एवं ईंधन की बचत हेतु निर्धारित गति सीमा में गाड़ी को चलाने बारे, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद, नेक व्यक्ति बनने, नशा करके गाड़ी न चलाने, सीट बेल्ट लगाने, गति सीमा के अंदर गाड़ी चलाने, लाल बत्ती पार न करने, वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करने तथा हेलमेट पहनने इत्यादि बारे में जागरूक किया।
कार्यशाला में मोटर व्हीकल निरीक्षक साहिल धर्माणी, उप पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार, डॉ0 मोहित तथा अमरजीत सिंह ने भी सड़क सुरक्षा की बारीकियों की जानकारी प्रदान की।
कार्यशाला में पथ परिवहन निगम व निजी बस ऑपरेटरों के चालक व परिचालक, ट्रक, बस तथा टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों, ड्राईविंग स्कूल के संचालक सहित स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा तथा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारियों ने भाग लिया।
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वे आज जिला परिषद सभागार, भ्यूली में सड़क सुरक्षा पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अधिकतर लोग सड़क सुरक्षा को अभी भी औपचारिकता मात्र समझते हैं, जबकि विश्व भर में प्रतिवर्ष 20 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां देते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा लगभग 1 लाख 25 हजार है यानि हर चार मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार होता है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां पर 95 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती है।यहां प्रतिवर्ष लगभग 3 हजार छोटी-बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें लगभग 1200 लोग अपनी जान खो देते हैं तथा लगभग 5 हजार लोग घायल होते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने, विभिन्न सड़क चिन्हों पर ध्यान देने और सड़क सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने पर इन दुर्घटनाओं का कम किया जा सकता है।
कार्यशाला में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी गिरीश समरा ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर लोगों को सड़क सुरक्षा पर आधारित वीडियो व नाटक इत्यादि के माध्यम से जागरूक किया जाता है। उन्होंने वाहनों का उचित रखरखाव एवं ईंधन की बचत हेतु निर्धारित गति सीमा में गाड़ी को चलाने बारे, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद, नेक व्यक्ति बनने, नशा करके गाड़ी न चलाने, सीट बेल्ट लगाने, गति सीमा के अंदर गाड़ी चलाने, लाल बत्ती पार न करने, वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करने तथा हेलमेट पहनने इत्यादि बारे में जागरूक किया।
कार्यशाला में मोटर व्हीकल निरीक्षक साहिल धर्माणी, उप पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार, डॉ0 मोहित तथा अमरजीत सिंह ने भी सड़क सुरक्षा की बारीकियों की जानकारी प्रदान की।
कार्यशाला में पथ परिवहन निगम व निजी बस ऑपरेटरों के चालक व परिचालक, ट्रक, बस तथा टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों, ड्राईविंग स्कूल के संचालक सहित स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा तथा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारियों ने भाग लिया।
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