आखिर क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा, जानिए महत्व, जानिए सही दिन

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

13 नवम्बर 2023

दीपावली का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. दीपावली को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इसके बाद गोवर्धन की पूजा की जाती है. यह पूजा हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। इस दिन भगवान गोवर्धन यानी गिरिराज जी की पूजा का विधान है। साथ ही श्री कृष्ण की भी पूजा की जाती है. बता दें कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन भगवान को 56 भोग लगाया जाता है. इस दिन गोवर्धन परिक्रमा करने का भी बहुत बड़ा महत्व होता है।

सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा के त्योहार का बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन भक्त भगवान श्री कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की विशेष पूजा करते हैं। गोवर्धन पूजा श्री कृष्ण को समर्पित होती है. इसके साथ बताया कि इस दिन भक्तों को गोवर्धन पर्वत के साथ भगवान श्री कृष्ण की पसंदीदा गायों की पूजा करने पर भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

कब से शुरू हुई गोवर्धन पूजा
हिंदू पौराणिक कथाओं अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र देवता के प्रकोप से वृन्दावन के लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था. इसके बाद से लोगों ने इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ-साथ भगवान कृष्ण की पूजा शुरू कर दी। साथ ही कान्हा को ‘गोवर्धनधारी’ और ‘गिरिरधारी’ नाम से संबोधित किया गया।

गोवर्धन पूजा (14 नवंबर) को पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक है. पूजा की अवधि कुल 2 घंटे 9 मिनट की होगी. वहीं, इस दिन शोभन योग और अनुराधा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है. शोभन योग 14 नवंबर को सुबह से दोपहर 1 बजकर 7 मिनट तक है. वहीं, अनुराधा नक्षत्र सुबह से लेकर 15 नवंबर की रात 3 बजकर 24 मिनट तक है।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

Share the news