कालका-शिमला हाईवे चंबाघाट रेल ओवरब्रिज पर 15 अगस्त के बाद से दौड़ेंगे वाहन, ट्रायल हुए सफल

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

10 अगस्त 2024

Kalka-Shimla nh: Vehicles will run on Chambaghat rail overbridge after August 15, trial successful

कालका-शिमला नेशनल हाईवे-पांच पर चंबाघाट में अब लोगों को जाम से छुटकारा मिल जाएगा। रेलवे लाइन के ऊपर बनाए ब्रिज से 15 अगस्त के बाद वाहन दौड़ना शुरू हो जाएंगे। कंपनी की ओर से इसका सफल ट्रायल कर लिया गया है। ट्रायल के बाद रिपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दी है। इसके बाद एनएचएआई ने वाहनों की आवाजाही शुरू करने की भी मंजूरी दे दी है। वहीं कंपनी ने निर्णय लिया है कि 15 अगस्त के बाद रेल ओवरब्रिज को शुरू कर दिया जाएगा। चंबाघाट में कई बार जाम से लोगों को दोचार होना पड़ता है।  वहीं, रेलवे फाटक लग जाने के बाद भी जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

अब रेलवे ओवरब्रिज का कार्य पूरा होने के बाद लोगों को फाटक का झंझट भी खत्म हो जाएगा। गौरतलब है कि हाईवे पर दूसरे चरण में चंबाघाट (सोलन) से कैथलीघाट तक फोरलेन का निर्माण कार्य चला हुआ है। सड़क को फोरलेन में बदलने के लिए पहाडि़यों की कटिंग की जा रही है। ऐसे में लोगों को परेशानी भी पेश आ रही है। वहीं, शहर के साथ लगते चंबाघाट में रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य हुआ है। निर्माण कार्य अक्तूबर-2019 में शुरू हुआ था। पहले इसे कंपनी ने एक वर्ष में कार्य पूरा करने का दावा किया था।  निर्धारित लक्ष्य में कार्य को पूरा करने के लिए कंपनी ने तेजी से कार्य शुरू किया, लेकिन कोरोना और 2023 की बरसात ने बाधा डाली थी। अब कार्य पूरा कर लिया गया है। इस कार्य के पूरा होने पर लोग आरामदायक सफर कर पाएंगे।

600 मीटर लंबा है रेल ओवरब्रिज
600 मीटर लंबे ब्रिज के फ्लाईओवर पर कुल 19 स्पैन हैं। चंबाघाट में रेलवे ट्रैक पर बना स्पैन सबसे ऊंचा है, जिसकी लंबाई 51.480 मीटर है। जबकि बाकी सभी स्पैन 30.5 मीटर के हैं। सोलन की तरफ से फ्लाईओवर तक पहुंचने वाली अप्रोच रोड की लंबाई 175 मीटर है, जबकि शिमला की तरफ से इसकी लंबाई 350 मीटर है। दोनों ओर सर्विस लेन भी बनाई गई है। इससे दुर्घटनाओं के कम होने का अंदेशा भी है। रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। 15 अगस्त के बाद शिमला की ओर व चंडीगढ़ की ओर जाने वाले वाहन इसका प्रयोग कर सकेंगे। इससे चंबाघाट में लगने वाले जाम से भी छुटकारा मिल जाएगा। -आनंद दहिया, प्रोजेक्ट डारेक्टर, एनएचएआई, शिमला
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