कुल्लू की तीर्थन घाटी में फागली उत्सव की धूम, घाटी में साल भर अनेक मेलों और धार्मिक उत्सवों का होता है आयोजन

#खबर अभी अभी कुल्लू ब्यूरो*

14 फरवरी 2023

हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की तीर्थन घाटी में फागली उत्सव की धूम है। घाटी में साल भर अनेक मेलों और धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता है जो यहां की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाते हैं। तीर्थन घाटी में हर साल 13 से 15 फरवरी तक फागली उत्सव में मुखौटा नृत्य का आयोजन फाल्गुन संक्रांति के दौरान किया जाता है। मान्यता के अनुसार कुछ चयनित किए हुए लोगों की ओर से मुखौटा नृत्य कर गांव से बुरी शक्तियों को भगाया जाता है। ऐसे माना जाता है कि इससे पूरे साल भर गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी कड़ी में तीर्थन घाटी के गांव पेखड़ी, नाहीं, तिंदर, डिंगचा, फरियाडी, शर्ची, बशीर और कलवारी में फागली उत्सव मनाया जा रहा है। तीर्थन घाटी में पर्यटक घूमने के साथ यहां के प्राचीनतम मुखौटा नृत्य देखने का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं। बुधवार को इस तीन दिवसीय फागली उत्सव का समापन हो जाएगा।

परंपरा के अनुसार फाल्गुन संक्रांति के दिन सोमवार को देवता पीऊली नाग का रथ सजाया गया। देव विधिविधान से देवता की पूजा-अर्चना की गई। देवता अपने हारियान क्षेत्र बटाहर गांव की परिक्रमा पर निकले। देवता ने घर-घर जाकर हारियानों को आशीर्वाद दिया। हारियानों ने अपने आराध्य देव पीऊली नाग का फूल-मालाओं से स्वागत किया। बटाहर गांव में पूरा दिन पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। देवता के कारदार अजीत ठाकुर ने कहा कि 18 नाग देवताओं में पीऊली नाग का फागली पर्व सबसे पहले मनाया जाता है। इसके बाद ही अन्य नागों का फागली उत्सव मनाया जाएगा। कहा कि इस बार भी फाल्गुन संक्रांति के दिन देवता के सम्मान में फागली उत्सव मनाया गया। हारियान क्षेत्र के अलावा अन्य जगहों से भी श्रद्धालु देवता पीऊली नाग के दर्शन के लिए पहुंचे। उधर, पुजारी उत्तम ने कहा कि फागली उत्सव के दिन ही आगामी एक साल के लिए देवता के मुख्य कारकून भी चुने गए हैं।

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