कुल्लू में 40 दिनों तक चलता है पारंपरिक होली उत्सव, चंद्रग्रहण के चलते पहले दिन बंद रहेगा रघुनाथ मंदिर

कुल्लू –
जिला कुल्लू में होली का पर्व बड़े ही पारंपरिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। यहां होली का उत्साह कई दिन पहले ही शुरू हो जाता है और बसंत उत्सव के साथ इसकी शुरुआत होती है। करीब 40 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में क्षेत्र में भक्ति और लोक संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलती है।
होलाष्टक के दौरान महंत और श्रद्धालु अपने घरों से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ होली के पारंपरिक गीत गाते हुए भगवान रघुनाथ जी के दरबार पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और होली गायन करते हैं। इसी के साथ होली उत्सव का विधिवत आगाज़ हो जाता है।
इस संबंध में रघुनाथ मंदिर कुल्लू के कारदार दानवेंद्र ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार होली के पहले दिन चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण के चलते मंदिर दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक बंद रहेगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं से ग्रहण काल के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखने, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर ही मंदिर आने की अपील की है। उनका कहना है कि ग्रहण के समय अशुद्ध काल माना जाता है, इसलिए परंपराओं के अनुसार मंदिर के कपाट बंद रखे जाएंगे।
कुल्लू ब्यूरो सुशांत शर्मा की रिपोर्ट

Share the news