
कुनिहार।
श्री कुर्गन देव सेवा समिति कोठी द्वारा कुर्गन देव मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का विधिवत शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। गुरुवार सायं कलश स्थापना के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र भर से श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मंदिर परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर कथा व्यास आचार्य हेमन्त भारती (लुटरू वाले बाबा जी) ने अपने मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करवाते हुए ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जो व्यक्ति को सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि भक्ति माता के दो पुत्र—ज्ञान और वैराग्य—सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी थे। उस समय समाज में धर्म, सत्य और सदाचार का बोलबाला था, जिसके कारण ज्ञान और वैराग्य का विशेष सम्मान होता था। लेकिन जैसे-जैसे कलियुग का प्रभाव बढ़ा, मनुष्य भौतिकता, लोभ, मोह और अहंकार में उलझता चला गया। परिणामस्वरूप ज्ञान (सत्य की समझ) और वैराग्य (मोह से विरक्ति) कमजोर होकर वृद्ध और अशक्त हो गए।
उन्होंने आगे बताया कि जब देवर्षि नारद मुनि ने भक्ति माता को दुखी अवस्था में देखा और उनके दोनों पुत्रों को अचेत समान पाया, तो वे अत्यंत व्यथित हुए। उन्हें जागृत करने के लिए नारद मुनि ने वेदों का पाठ, यज्ञ और उपदेश जैसे अनेक प्रयास किए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। अंततः यह निष्कर्ष निकला कि श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण ही ज्ञान और वैराग्य को पुनः जागृत करने का एकमात्र उपाय है।
आचार्य ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे जीवन में भक्ति के साथ-साथ ज्ञान और वैराग्य को भी अपनाएं, तभी जीवन सार्थक बन सकता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का नियमित श्रवण व्यक्ति के अंतर्मन को शुद्ध करता है और उसे ईश्वर के निकट ले जाता है।
समिति के प्रधान ललित ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ 16 अप्रैल तक चलेगा। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक कथा प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा सायं 4 बजे से प्रसाद वितरण व भंडारा तथा रात्रि 8 बजे से 9 बजे तक संध्या आरती एवं संकीर्तन का आयोजन होगा।
उन्होंने बताया कि समापन दिवस पर पूर्णाहुति, कथा सार एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पावन आयोजन में भाग लें और धर्म लाभ अर्जित करें।





