
#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*
20 सितंबर 2024
कर्मचारियों की देनदारी से संबंधित बहुत से मामले हारने के बाद हिमाचल सरकार ने निगरानी की प्रक्रिया को और कड़ा करने का फैसला किया है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में इस बारे में एक बैठक हुई। इस बैठक में वित्त विभाग, कार्मिक विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया था। राज्य सरकार ऐसे मामलों में सरकारी पक्ष को मजबूत करना चाहती है, जहां विभाग की ढील या लापरवाही के कारण कोर्ट केस में नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे बहुत से मामलों में निष्पादन या अवमानना याचिकाओं में विभागों की तरफ से जवाब ही कोर्ट में देरी से दिया जा रहा है, इसलिए अब इस बारे में तीन विभागों के लिए डेडलाइन तय हो रही है।
कोर्ट में फैसले को चुनौती देने के लिए भी एक निर्धारित समय सीमा है। कई मामलों में इस समय सीमा से बाहर याचिका दायर हो रही है। हाल ही में ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल सरकार से संबंधित एक मामले में भी कोर्ट ने याचिका में हुई देरी को माफ नहीं किया था। इस बारे में अब मुख्य सचिव नया मेकैनिज्म तैयार कर रहे हैं।
इस पर दो तरह से निगरानी होगी। एक तो आईटी विभाग के सॉफ्टवेयर के जरिए लीगल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया जाएगा और दूसरी तरफ तीन विभागों से लेकर एडवोकेट जनरल ऑफिस के लिए भी डेडलाइन निर्धारित होगी। महाधिवक्ता कार्यालय को कोर्ट का फैसला आने के तीन दिन के भीतर संबंधित विभाग और सरकार को इसके बारे में अवगत करवाना होगा





